सोशल संवाद/डेस्क : आज के समय में करियर, आर्थिक स्थिरता और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाएं पहले की तुलना में देर से मां बन रही हैं। हालांकि मेडिकल साइंस ने इस दिशा में काफी तरक्की की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण करने पर महिलाओं में दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हाल के वर्षों में भारत में प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आए हैं, जो चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।

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क्यों बढ़ता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं। 35 की उम्र के बाद महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। गर्भावस्था के दौरान दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 40–50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे में यदि दिल पहले से कमजोर है, तो हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
प्रेग्नेंसी और हार्ट पर दबाव
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ना और मानसिक तनाव दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। खासतौर पर देर से मां बनने वाली महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया, हाई बीपी और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है। ये सभी स्थितियां सीधे तौर पर हार्ट अटैक के रिस्क से जुड़ी हुई हैं।
भारत में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
भारत में महिलाओं में हार्ट डिजीज के शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित कार्डियक चेकअप की कमी देखी जाती है। इसके अलावा, तनावपूर्ण जीवनशैली, नींद की कमी और अनहेल्दी डाइट भी दिल की बीमारियों को बढ़ावा दे रही है।
हार्ट अटैक के ‘साइलेंट’ संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग और कई बार बेहद हल्के होते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है। इन संकेतों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- सीने में हल्का दबाव या जलन
- अचानक थकान और सांस फूलना
- पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द
- उलटी या जी मिचलाना
- अत्यधिक पसीना आना
- चक्कर आना या बेचैनी
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
कैसे करें बचाव?
35 की उम्र के बाद मां बनने की योजना बना रही महिलाओं को कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए:
- गर्भधारण से पहले पूरा हेल्थ चेकअप कराएं
- ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें
- संतुलित आहार और हल्का व्यायाम अपनाएं
- तनाव से बचें और पूरी नींद लें
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें
- प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित कार्डियक मॉनिटरिंग कराएं
विशेषज्ञों की सलाह
कार्डियोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट दोनों का मानना है कि सही समय पर जांच और जागरूकता से प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और समय पर इलाज लेना बेहद जरूरी है।










