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दो-तिहाई बुजुर्ग पेंशन के लाभ से वंचित, रिपोर्ट ने चिंता जताई

By Tamishree Mukherjee

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दो-तिहाई बुजुर्ग पेंशन के लाभ से वंचित, रिपोर्ट ने चिंता जताई
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सोशल संवाद/डेस्क : भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में देश की कुल आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी है। इसके बावजूद करीब दो-तिहाई बुजुर्ग किसी सामाजिक, अनिवार्य या स्वैच्छिक पेंशन योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं। ऐसे में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए नियमित आय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) की अगस्त 2026 की रिपोर्ट में इस स्थिति पर चिंता जताई गई है और मौजूदा पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पेंशन व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्गों को बुढ़ापे में आय की सुरक्षा देना और अधिक से अधिक कामगारों को पेंशन के दायरे में लाना होना चाहिए।

पेंशन पर खर्च बढ़ा, लेकिन लाभार्थी कम एनआईपीएफपी रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पर लगातार अधिक खर्च कर रही है। इसके बावजूद इस खर्च का लाभ बुजुर्गों की पूरी आबादी को नहीं मिल रहा है। पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पाने वालों में मुख्य रूप से पूर्व सरकारी कर्मचारी और उनके जीवित परिजन शामिल हैं। इन्हें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ मिलता है। इन लाभार्थियों की संख्या कुल बुजुर्ग आबादी के 7 फीसदी से भी कम है।

संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर मुकेश कुमार आनंद द्वारा तैयार रिपोर्ट पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताती है, जिससे अधिक संख्या में बुजुर्गों को आय सुरक्षा दी जा सकें।

दो व्यवस्था बनाने का सुझाव

रिपोर्ट में पेंशन व्यवस्था को दो हिस्सों में विकसित करने का सुझाव दिया गया है। पहला हिस्सा जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा आधारित पेंशन का हो, जिसका खर्च सरकार उठाए। दूसरा हिस्सा कामगारों के लिए रोजगार आधारित पेंशन का हो, जिसे कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान से चलाया जाए। इससे पेंशन के लिए पूरी तरह सरकारी राजस्व पर निर्भरता कम की जा सकती है।

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