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कार्यस्थल हादसे में पैर गंवाने वाले श्रमिक को 10 लाख रुपये मुआवजा, कंपनी ने नौकरी और कृत्रिम पैर का दिया आश्वासन

By Riya Kumari

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कार्यस्थल हादसे में पैर गंवाने वाले श्रमिक को 10 लाख रुपये मुआवजा, कंपनी ने नौकरी और कृत्रिम पैर का दिया आश्वासन

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सोशल संवाद / जमशेदपुर: कार्यस्थल पर हुए गंभीर हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाले कुडुकतुपा निवासी चंपाई मांझी को राहत देते हुए नरसिंह इस्पात कंपनी ने 10 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही कंपनी ने उन्हें कृत्रिम पैर उपलब्ध कराने, नियमित पेंशन देने और स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद रोजगार देने का भी लिखित आश्वासन दिया है।

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जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले नरसिंह इस्पात कंपनी में कार्य के दौरान चंपाई मांझी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसा इतना गंभीर था कि इलाज के दौरान उनका एक पैर काटना पड़ा। उनका उपचार टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में किया गया।

इसी मामले के समाधान को लेकर बुधवार को बाराद्वारी स्थित कंपनी कार्यालय में चंपाई मांझी के परिवार और कंपनी प्रबंधन के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में चंपाई मांझी की पत्नी फूकमती मांझी, परिवार के अन्य सदस्य, कंपनी के डायरेक्टर अजय सिंह तथा भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री पप्पू वर्मा मौजूद रहे। समझौता प्रक्रिया में पप्पू वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई। बैठक में गाजू मांझी, कमलाकांत उरांव, राजू उरांव समेत कई अन्य लोग भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता संपन्न हुआ। समझौते के तहत कंपनी ने कुल 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया। इसमें से 7 लाख रुपये का चेक तत्काल परिवार को सौंप दिया गया, जबकि शेष 3 लाख रुपये एक माह के भीतर देने का आश्वासन दिया गया है।

कंपनी प्रबंधन ने यह भी भरोसा दिलाया कि चंपाई मांझी के लिए कृत्रिम पैर (Artificial Leg) लगाने की पूरी व्यवस्था कंपनी करेगी। साथ ही उनकी स्वास्थ्य स्थिति बेहतर होने के बाद कंपनी में उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा नियमित पेंशन सुविधा देने का भी वादा किया गया है।

समझौते के बाद चंपाई मांझी की पत्नी फूकमती मांझी और परिजनों ने संतोष जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि कंपनी अपने सभी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगी। परिवार का कहना है कि इससे भविष्य में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

इस समझौते को श्रमिक हितों और मानवीय संवेदनाओं की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी उम्मीद जताई कि इससे कार्यस्थलों पर श्रमिक सुरक्षा और जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

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