सोशल संवाद / डेस्क : World Pharmacist Day 2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा, शोध, नवाचार, स्वास्थ्य-जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुआ और कुलसचिव डॉ. नीत नैना ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
शिक्षा को समाज की जरूरतों से जोड़ने का संदेश
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नैना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों के पास विज्ञान, स्वास्थ्य और समाज के बीच सेतु बनने का अवसर है।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वास्थ्य-जागरूकता बढ़ाने, लोगों को दवाओं के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने में अपनी शिक्षा का उपयोग करने की अपील की। साथ ही निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
शोध और नवाचार को बताया जरूरी
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार से भी जुड़ना होगा।
उन्होंने कहा कि समस्याओं को केवल चुनौती के रूप में देखने के बजाय उन्हें शोध और नवाचार के अवसर के तौर पर समझना चाहिए। दवा निर्माण, औषधीय अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल हेल्थ और जनस्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, शोध क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो सके।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने का संदेश
विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ व्यक्ति के साथ-साथ समाज और राष्ट्र को भी मिले।
उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार, कौशल विकास और रचनात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के क्षेत्र में नई दवाओं, तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं हैं।
प्रभाकर सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा और कौशल की भूमिका पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के साथ समाज की जरूरतों को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सके।
उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान को रोजगार से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश दिया और ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम तथा सेवा भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में बी.फार्मा पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी संदीप सिंह देव ने कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकगण, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसके बाद राष्ट्रीय गान एवं राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सामूहिक छायाचित्र भी लिया।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस-2026 का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य-जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व, जनसेवा, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने का अवसर बना।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हर्ष वर्मा, किशोर कुमार, उमा महतो, सफीनाज तैयबा और प्रतीक तिवारी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।












