सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के जमशेदपुर के बहरागोड़ा क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब सुवर्णरेखा नदी किनारे द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का एक शक्तिशाली बम मिला। इस खतरनाक बम को भारतीय सेना और बम निरोधक दस्ते ने संयुक्त ऑपरेशन में सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया।

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कैसे मिला नदी किनारे खतरनाक बम?
जानकारी के मुताबिक, यह बम बहरागोड़ा के पास नदी के तट पर स्थानीय लोगों को दिखाई दिया। इसके बाद तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई, जिसके बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरा बनाकर सील कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बम पहले भी मिले बमों की तरह ही काफी भारी और शक्तिशाली था, जिससे बड़ी तबाही की आशंका जताई जा रही थी।
सेना ने ऐसे किया बम को डिफ्यूज
घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची। बम को सुरक्षित तरीके से हटाकर एक नियंत्रित स्थान पर ले जाया गया, जहां नियंत्रित विस्फोट (Controlled Blast) के जरिए इसे निष्क्रिय किया गया।
इस दौरान आसपास के इलाके को खाली कराया गया और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि न हो।
पहले भी मिल चुके हैं ऐसे बम
यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में इस तरह का बम मिला हो।
- मार्च 2026 में भी इसी क्षेत्र से दो बम बरामद हुए थे
- ये सभी बम द्वितीय विश्व युद्ध काल के बताए जा रहे हैं
- कई मामलों में बम अमेरिकी निर्माण के पाए गए हैं
लगातार मिल रहे ऐसे बमों से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है और पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।
क्यों खतरनाक हैं ऐसे पुराने बम?
विशेषज्ञों के अनुसार, दशकों पुराने होने के बावजूद ऐसे बम बेहद खतरनाक होते हैं क्योंकि:
- इनमें विस्फोटक क्षमता बनी रहती है
- जरा सी छेड़छाड़ से बड़ा हादसा हो सकता है
- आसपास के कई किलोमीटर तक नुकसान पहुंच सकता है
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अगर यह बम फटता, तो भारी तबाही हो सकती थी।
बहरागोड़ा में सुवर्णरेखा नदी किनारे मिले इस बम को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, बार-बार ऐसे बम मिलने की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं।









