सोशल संवाद / सरायकेला: देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में शामिल एक्सएलआरआई, जमशेदपुर के 56 एमबीए छात्र-छात्राओं ने टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित “अनुरूम” कार्यक्रम के तहत सरायकेला प्रखंड के कमलपुर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों में तीन दिवसीय शैक्षणिक प्रवास किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को करीब से समझने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं का अध्ययन किया।
यह भी पढे : पटनायक टोला में सड़क किनारे कचरे का अंबार, गंदगी से परेशान लोगों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षक नृपराज महानंदा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कंचनपुर, बेरगाडीह, बाघराईडीह, कोयरा, खोड़काबाद, मोसोडीह, नारायणडीह, बड़गांव, तेंतालटांड और बंदीराम सहित कई गांवों का दौरा किया। छात्रों ने ग्रामीण परिवारों के बीच रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पेयजल, रोजगार, आजीविका और पलायन जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं की जमीनी स्थिति को समझने का प्रयास किया।
ग्रामीण जीवन से रूबरू हुए भावी प्रबंधक
भ्रमण के दौरान छात्रों ने ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी दिनचर्या, संघर्ष तथा विकास से जुड़ी अपेक्षाओं को जाना। विद्यार्थियों ने ग्रामीण समाज की सामुदायिक भावना, सादगी और आत्मीयता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अनुभव किताबों और कक्षाओं से कहीं अधिक सीख प्रदान करते हैं।
पारंपरिक स्वागत के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत कमलपुर पंचायत सचिवालय में हुई, जहां पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से विद्यार्थियों का स्वागत किया। इस अवसर पर मुखिया नव किशोर सरदार, ग्राम प्रधान हीरालाल महतो, हेमंत कुमार महतो, कार्यक्रम समन्वयक मुकुंद महतो, सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान तथा मां लक्ष्मी महिला समिति की पदाधिकारियां मौजूद रहीं।
मुखिया नव किशोर सरदार ने पंचायत में चल रही विकास योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण युवाओं को ग्रामीण भारत की वास्तविक तस्वीर से परिचित कराते हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक विकास के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाते हैं।
‘अनुरूम’ कार्यक्रम का उद्देश्य
टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि “अनुरूम” कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भावी प्रबंधकों को ग्रामीण भारत की जमीनी हकीकत से जोड़ना है। इसके माध्यम से छात्रों को समाज के विभिन्न वर्गों की चुनौतियों, अवसरों और विकास की जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है, जिससे वे भविष्य में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार नेतृत्व विकसित कर सकें।
स्थानीय संस्कृति का भी लिया आनंद
तीन दिवसीय प्रवास के समापन पर विद्यार्थियों ने ग्रामीणों के साथ सामूहिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय परंपराओं, लोक संस्कृति और सामुदायिक जीवन की झलक को करीब से महसूस किया।









