सोशल संवाद / डेस्क : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद घोटाले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने पर आश्चर्य जताया है। उन्होंने कहा कि चंपत राय-अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलना प्रभु श्रीराम के साथ धोखा है। चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, निर्माण कार्य में चोरी और जमीन ख़रीद में चोरी हुई। हर चोरी के मुख्य आरोपी चंपत राय और अनिल मिश्रा एसआईटी की जांच में बरी कैसे हो सकते हैं?

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मैंने जो जमीन घोटाले के कागज़ात एसआईटी को सौंपें हैं, उसमें भी चंपत राय और अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर हैं। आखिर ये लोग बच कैसे सकते हैं? मैं कुछ और कागजात सौंपने के लिए एसआईटी से जल्द मिलने का समय मांगूंगा।
बुधवार को एक वीडियो जारी कर “आप” के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि बताया जा रहा है कि एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है। जबकि 17 अगस्त को खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को जल्द अपनी जांच पूरी करके स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। जब सुप्रीम कोर्ट खुद स्टेटस रिपोर्ट मांग रहा है, तो इन्हें क्लीन चिट कैसे मिल गई? दोनों में से कौन सी खबर सही है?
संजय सिंह ने सवाल किया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा कैसे बच सकते हैं? पहली एसआईटी को जमीन के जो 13 दस्तावेज सौंपे गए थे, उनमें बहुत साफ तौर पर दर्ज है कि 2 करोड़ रुपए की जमीन 5 मिनट के बाद 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई और उस पर चंपत राय के हस्ताक्षर हैं। जमीन के सभी सौदों में चंपत राय के हस्ताक्षर हैं। चाहे 9 करोड़ रुपए की जमीन 55 करोड़ रुपए में खरीदी गई हो, 1 करोड़ 73 लाख रुपए की जमीन 24 करोड़ रुपए में खरीदी गई हो, या फिर 2 करोड़ रुपए की जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई हो। ऐसे 13 दस्तावेज अभी मेरे पास और बाकी हैं।
संजय सिंह ने कहा कि मैं यह बाकी 13 दस्तावेज एसआईटी को देना चाहता हूं। मुझे विवश न किया जाए कि मैं खुद सुप्रीम कोर्ट जाऊं और ये सारे कागजात वहां रखूं। एसआईटी चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट कैसे दे सकती है, जबकि यही लोग मुख्य आरोपी हैं? इन्होंने ही चढ़ावा चोरी, चंदा चोरी, आभूषण चोरी, निर्माण कार्य में चोरी और जमीनों का घोटाला किया है। इन मुख्य आरोपियों को क्लीन चिट मिलना बड़ी अजीब बात है और यह प्रभु श्री राम के साथ धोखा है। पूरा देश इसकी सच्चाई जानना चाहता है।
संजय सिंह ने कहा कि मैं एसआईटी से जल्द से जल्द मिलने का समय मांगूंगा, ताकि बाकी कागजात सौंपकर उनकी जांच शुरू कराई जा सके और पहले दिए गए कागजातों की जांच में क्या हुआ, यह भी पता चल सके।









