सोशल संवाद / रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। परीक्षा रद्द होने के बाद सफल अभ्यर्थियों में नाराजगी है और कई अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का किया रुख
राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद नियुक्त या सफल अभ्यर्थियों का एक वर्ग विरोध में उतर आया है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की है। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ दो अलग-अलग रिट याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा रद्द करने के खिलाफ भी एक याचिका दायर की गई है।
22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, 23 की जांच
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ा फैसला लेते हुए 2014 से अब तक आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय लिया है। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोगों का भरोसा बहाल करने की बात कही है।
सरकार की ओर से JPSC और JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच टीम भी गठित की गई है। टीम में 7 IPS अधिकारियों समेत 50 पुलिस अधिकारी शामिल हैं और उसे दो महीने में रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया गया है।
करीब 2000 सफल अभ्यर्थियों में नाराजगी
परीक्षा रद्द होने के बाद करीब 2,000 सफल अभ्यर्थियों ने अलग से आंदोलन शुरू किया है। इनमें ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जिन्हें JSSC-CGL के जरिए नियुक्ति मिल चुकी थी। बुधवार को नियुक्त अभ्यर्थियों ने रांची में प्रदर्शन किया और कुछ प्रदर्शनकारी सचिवालय परिसर में भी प्रवेश कर गए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें कथित अनियमितताओं की जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि यदि कुछ अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी की है तो केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
आज की सुनवाई पर टिकी नजर
अब सभी की नजर झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। सफल अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि अदालत उनके पक्ष को सुनेगी और सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर राहत मिल सकती है। वहीं, सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।









