सोशल संवाद / डेस्क : नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अब इस आपदा के बीच एक और बड़ा खतरा सामने आया, जब भूस्खलन से बनी झील का पानी अचानक ओवरफ्लो होने लगा। पानी बढ़ने से निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया और प्रशासन को कुछ समय के लिए राहत एवं बचाव अभियान रोकना पड़ा।

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रिपोर्टों के मुताबिक, झील में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा था। खतरे को देखते हुए लोगों और बचाव दलों को नदी के आसपास के इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई। नेपाल और चीन की ओर से बचाव दलों को भी कुछ समय के लिए सुरक्षित जगह पर रुकने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, बाद में झील से पैदा हुआ खतरा कुछ कम होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया। हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा बलों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है।
इस भीषण आपदा में नेपाल और तिब्बत में 550 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आई तेज बाढ़ और मलबे ने सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और कई बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव कार्यों में सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना है, क्योंकि कई सड़कें और पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
प्रशासन अब नई झीलों और संभावित भूस्खलन पर लगातार निगरानी रख रहा है, ताकि दोबारा बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
नेपाल में हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं।









