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SIR सत्यापन में स्पष्टता हो, वास्तविक मतदाता परेशान न हों – रामहरि गोप

By Tamishree Mukherjee

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There should be clarity in the SIR verification process

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सोशल संवाद / चाईबासा: SIR के तहत वर्ष 2003 के रिकॉर्ड से मैपिंग व सत्यापन के बाद भी मतदाताओं को दोबारा नोटिस, मूल दस्तावेज तथा कभी ग्रामीण मुंडा तो कभी पंचायत मुखिया से सत्यापन कराने की प्रक्रिया पर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने सवाल उठाया है।

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उन्होंने कहा कि जब मैपिंग और सत्यापन हो चुका, तो बार-बार नई जांच क्यों? SIR की अंतिम और आधिकारिक सत्यापन प्रक्रिया स्पष्ट की जाए। रामहरि गोप ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त से मांग की कि नोटिस, दस्तावेजों की अनिवार्यता एवं अलग-अलग सत्यापन की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए। गरीब, बुजुर्ग और ग्रामीण मतदाताओं को कागजी प्रक्रिया में न उलझाया जाए।

फर्जी मतदाता हटें, लेकिन किसी वास्तविक मतदाता का अधिकार मामूली रिकॉर्ड अंतर या दस्तावेज की कमी से प्रभावित न हो।

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