सोशल संवाद / जमशेदपुर : सदर अस्पताल से मरीजों को एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल या रिम्स रेफर करने के बढ़ते मामलों पर सिविल सर्जन ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अस्पताल अधीक्षक को निर्देश दिया कि किसी भी मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने से पहले उसका स्पष्ट और पुख्ता कारण दर्ज करना होगा। साथ ही मरीज के रेफरल की आवश्यकता की समीक्षा भी की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सदर अस्पताल से कुछ दिनों – से रोज दो-तीन मरीजों को दूसरे अस्पताल रेफर करने के मामले सामने आ रहे हैं। सिविल सर्जन का कहना है कि यहां उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों का अधिकतम उपयोग करते हुए मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की जरूरत है।
सुविधाएं बढ़ीं तो रेफर नहीं होंगे मरीज :
सदर अस्पताल में कुछ समय में इलाज की सुविधाओं में लगातार विस्तार किया गया है। अस्पताल में हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) शुरू की गई है। कोल्हान प्रमंडल के सरकारी अस्पतालों में सदर अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
इसके अलावा हड्डी रोग, सर्जरी समेत कई विभागों में नए चिकित्सकों की तैनाती की गई है। इन सुविधाओं के बावजूद मरीजों को एमजीएम या रिम्स रेफर किए जाने पर सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रबंधन को कहा है कि जिन मरीजों का इलाज सदर अस्पताल में संभव है, उन्हें अनावश्यक रूप से रेफर नहीं किया जाए। गंभीर मरीजों को रेफर करने की स्थिति में बीमारी, उपलब्ध सुविधा और रेफर करने की आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
मरीजों के लिए जरूरत के संसाधन मांगे जाएंगे
अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए अस्पताल में जो भी अतिरिक्त संसाधन या विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत होगी, उसकी मांग स्वास्थ्य विभाग से की जाएगी। उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक मरीजों का इलाज हो और उन्हें दूसरे अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़े। इसके लिए चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन को मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है।










