Wireless Charging: फोन रखते ही होने लगता है चार्ज, आखिर बिना तार कैसे पहुंचती है बिजली? जानें पूरी टेक्नोलॉजी

By Riya Kumari

Published :

Follow
Wireless Charging: फोन रखते ही होने लगता है चार्ज, आखिर बिना तार कैसे पहुंचती है बिजली? जानें पूरी टेक्नोलॉजी

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : आज स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने के लिए केबल का इस्तेमाल आम है। लेकिन वायरलेस चार्जिंग की मदद से फोन को सिर्फ एक खास चार्जिंग पैड पर रखने से ही बैटरी चार्ज होने लगती है। इसमें फोन और चार्जर के बीच कोई फिजिकल केबल कनेक्शन नहीं होता।

यह भी पढे : Huawei 2027 में दो AI चिप्स लॉन्च करेगा

बिना तार फोन तक कैसे पहुंचती है बिजली?

Wireless Charging मुख्य रूप से Electromagnetic Induction के सिद्धांत पर काम करती है। वायरलेस चार्जर के अंदर एक ट्रांसमीटर कॉइल लगी होती है। जब चार्जर को बिजली मिलती है तो यह कॉइल एक बदलता हुआ मैग्नेटिक फील्ड बनाती है।

फोन के अंदर भी एक रिसीवर कॉइल होती है। जब फोन को चार्जिंग पैड पर सही स्थिति में रखा जाता है, तो चार्जर की कॉइल से बना मैग्नेटिक फील्ड फोन की रिसीवर कॉइल में इलेक्ट्रिक करंट पैदा करता है। यही ऊर्जा आगे बैटरी को चार्ज करने में इस्तेमाल होती है।

फोन के अंदर लगी कॉइल का क्या है काम?

फोन के बैक पैनल के अंदर एक पतली कॉइल लगी होती है। वायरलेस चार्जिंग के दौरान यही कॉइल चार्जिंग पैड से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी प्राप्त करती है।

हालांकि, यह ऊर्जा सीधे बैटरी तक नहीं जाती। फोन का चार्जिंग सर्किट प्राप्त ऊर्जा को बैटरी के लिए जरूरी वोल्टेज और करंट में बदलता है। चार्जर और फोन के बीच कम्युनिकेशन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

Qi Standard क्या है?

वायरलेस चार्जिंग में आपने Qi (ची) नाम जरूर सुना होगा। यह वायरलेस पावर ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख स्टैंडर्ड है। कई स्मार्टफोन और वायरलेस चार्जर Qi मानकों को सपोर्ट करते हैं।

इस तरह के स्टैंडर्ड का उद्देश्य फोन और चार्जर के बीच पावर ट्रांसफर को एक निर्धारित तरीके से नियंत्रित करना है। इससे जरूरत से ज्यादा पावर और ओवरहीटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है।

फोन रखते ही चार्जिंग कैसे शुरू हो जाती है?

जब आप फोन को वायरलेस चार्जिंग पैड पर रखते हैं, तो फोन और चार्जर एक-दूसरे की मौजूदगी को पहचानते हैं। इसके बाद चार्जर पावर ट्रांसफर शुरू करता है।

फोन यह भी मॉनिटर करता रहता है कि उसे कितनी ऊर्जा की जरूरत है। इसलिए केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, फोन को चार्जर की कॉइल के ऊपर सही स्थिति में रखना जरूरी है। अगर फोन बहुत दूर या गलत जगह रखा गया है तो चार्जिंग धीमी हो सकती है।

Wireless Charging की खास बात क्या है?

वायरलेस चार्जिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बार-बार फोन में चार्जिंग केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। फोन को चार्जिंग पैड पर रखकर चार्जिंग शुरू की जा सकती है। यही वजह है कि यह तकनीक आधुनिक स्मार्टफोन और दूसरे गैजेट्स में तेजी से इस्तेमाल हो रही है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट