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AI से बदल रही जंग की तस्वीर, भारतीय सेना ने ट्रेनिंग से ऑपरेशन तक बढ़ाई ताकत

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : दुनिया में बदलते युद्ध के तौर-तरीकों के बीच अब तकनीक सबसे बड़ा हथियार बनकर उभर रही है। इसी दिशा में Indian Army ने भी बड़ा कदम उठाया है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence को अपने सिस्टम का अहम हिस्सा बना लिया है।

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पहले जहां युद्ध केवल हथियारों और सैनिकों की ताकत पर निर्भर होता था, वहीं अब डेटा और तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। भारतीय सेना इस बदलाव को समझते हुए AI का इस्तेमाल ट्रेनिंग, प्लानिंग और ऑपरेशनल कार्यों में कर रही है। इससे न केवल रणनीति मजबूत हो रही है, बल्कि फैसले लेने की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा तेज और सटीक हो गई है।

सेना के प्रशिक्षण संस्थानों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। National Defence Academy जैसे प्रमुख संस्थानों में अब AI, मशीन लर्निंग, साइबर वॉरफेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों को सिलेबस में शामिल किया गया है। यह बदलाव 2022-23 के दौरान किया गया, जिसका उद्देश्य भविष्य के सैनिकों को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार करना है।

इस नए सिलेबस में नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर पर खास जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि युद्ध के दौरान अलग-अलग सैन्य इकाइयों को एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे सूचना का आदान-प्रदान तेज और प्रभावी तरीके से हो सके। इससे युद्ध के मैदान में समन्वय बेहतर होगा और ऑपरेशन अधिक सटीक तरीके से अंजाम दिए जा सकेंगे।

AI का उपयोग मिलिट्री एक्सरसाइज में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके जरिए सैनिकों को जटिल और वास्तविक जैसे हालातों में अभ्यास कराया जाता है। यह तकनीक अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों का सिमुलेशन तैयार करती है, जिससे कमांडर और सैनिक अपनी रणनीति को और बेहतर बना सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से युद्ध के दौरान दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाता है। साथ ही, यह संभावित खतरों का पहले से आकलन करने में भी मदद करता है। इससे समय रहते कार्रवाई की जा सकती है और नुकसान को कम किया जा सकता है।

भारत के रक्षा अनुसंधान संगठनों, जैसे DRDO, भी AI आधारित तकनीकों पर तेजी से काम कर रहे हैं। ये संस्थान ऐसे सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो डेटा एनालिसिस, निगरानी और निर्णय लेने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाएंगे।

कुल मिलाकर, AI भारतीय सेना के लिए एक गेम चेंजर साबित हो रहा है। यह न केवल वर्तमान में सेना की ताकत बढ़ा रहा है, बल्कि भविष्य के युद्धों के लिए भी उसे पूरी तरह तैयार कर रहा है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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