सोशल संवाद / डेस्क : भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच लोग शरीर को ठंडा रखने के लिए तरह-तरह के ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। लेकिन बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का पारंपरिक पेय सत्तू आज भी सबसे असरदार देसी सुपरफूड माना जाता है। यह न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि डिहाइड्रेशन, कमजोरी और लू जैसी समस्याओं से बचाने में भी मदद करता है।
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क्यों खास है सत्तू?
सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने से तैयार किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करते हैं। यही वजह है कि गांवों में खेतों में काम करने वाले लोग आज भी गर्मियों में सत्तू का सेवन करना पसंद करते हैं।
हीटवेव में कैसे फायदेमंद है सत्तू?
गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के जरिए पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से बाहर निकलते हैं। इससे थकान, चक्कर और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है। सत्तू शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सत्तू की तासीर ठंडी होती है। जब इसे ठंडे पानी, नींबू, जीरा या छाछ के साथ मिलाकर पिया जाता है तो यह शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम करने में मदद करता है।
पाचन और वजन नियंत्रण में भी मददगार
सत्तू में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज, गैस तथा एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है। इसके अलावा यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।
डायबिटीज मरीज भी कर सकते हैं सेवन
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता।
सत्तू पीने का सही तरीका
गर्मियों में सत्तू का सेवन नमक, नींबू, भुना जीरा और ठंडे पानी के साथ करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। कई लोग इसे छाछ या प्याज के साथ भी लेते हैं, जिससे शरीर को अतिरिक्त ठंडक मिलती है।
इन बातों का रखें ध्यान
हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सत्तू का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट फूलना या गैस जैसी समस्या हो सकती है। साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाला सत्तू ही इस्तेमाल करना चाहिए और इसे सूखी जगह पर स्टोर करना चाहिए।










