सोशल संवाद / डेस्क : ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में गव्य विकास विभाग की योजनाएं जिले में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण आनंदपुर प्रखंड के आनंदपुर गांव की निवासी सुषमा देवी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर दुग्ध उत्पादन का सफल व्यवसाय खड़ा किया और आज न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
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आर्थिक संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का सफर
कुछ वर्ष पहले तक सुषमा देवी का परिवार सीमित आय पर निर्भर था। घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। ऐसे समय में उन्होंने हार मानने के बजाय स्वयं रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। इसी दौरान उन्हें गव्य विकास विभाग की योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली।
उन्होंने विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गोपालन प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां वैज्ञानिक पशुपालन, पशुओं का पोषण, रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और डेयरी व्यवसाय के बेहतर प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की।
सरकारी योजना से मिली नई शुरुआत
प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2021-22 में सुषमा देवी ने गव्य विकास विभाग की 50 प्रतिशत अनुदान योजना का लाभ लेकर गाय पालन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में अनुभव की कमी और सीमित संसाधनों के कारण कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन, संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण, स्वच्छ पशुशाला और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने डेयरी व्यवसाय को मजबूत बनाया।
रोजाना 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन
वर्तमान में सुषमा देवी के पास आठ दुधारू गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे स्थानीय बाजार में दूध की बिक्री के साथ-साथ घी, दही और पनीर जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।
इस नियमित आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं, घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं।
सुषमा देवी ने साझा किया अनुभव
सुषमा देवी का कहना है कि एक समय परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद कठिन था। गव्य विकास विभाग से मिले प्रशिक्षण और सरकारी सहायता ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत चुनौतीपूर्ण जरूर थी, लेकिन लगातार मेहनत और विभाग के सहयोग से आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाने की अपील की।
विभाग का लक्ष्य: वैज्ञानिक पशुपालन से बढ़े आय
जिला गव्य विकास पदाधिकारी राम नारायण शाश्वत ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि लाभुकों को वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़कर स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। विभाग प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह और समय-समय पर आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि यदि लाभुक प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाएं, तो पशुपालन अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।
उपायुक्त ने बताया प्रेरणादायक उदाहरण
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सुषमा देवी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, वैज्ञानिक सोच और निरंतर मेहनत से सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी उपलब्धि जिले की अन्य महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायक है।
किसानों और महिलाओं से अपील
पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं गव्य विकास विभाग ने जिले के किसानों और महिलाओं से अपील की है कि वे विभाग की प्रशिक्षण एवं अनुदान योजनाओं का लाभ उठाकर वैज्ञानिक पशुपालन अपनाएं। दुग्ध उत्पादन न केवल अतिरिक्त आय का मजबूत माध्यम है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती और महिला स्वावलंबन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।










