सोशल संवाद / रांची : ट्रेजरी घोटाले में एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला खुलासा सामन है कि कई जिलों के एसपी ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपने पदनाम से बैंक में खाते खोल रखे थे।
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जो पैसे सरकारी खजाने में रहने चाहिए थे, वो पैसे सीधे इन खातों में आते थे। फिर एसपी चेक के माध्यम से भुगतान करते थे। जबकि ट्रेजरी कोड में साफ कहा गया है कि जिसके लिए बिल ट्रेजरी भेजा जाएगा, भुगतान उसी के खाते में होगा।
जांच टीम को बोकारो, सरायकेला, रामगढ़, पलामू और जमशेदपुर में इसके सबूत मिले हैं। जमशेदपुर में वित्त वर्ष 2016-17 में एसपी के खाते में करीब 38 लाख रुपए आए थे, जो सिपाहियों को चेक से भुगतान किया गया था। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा जीपीएफ के स्थान पर सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘प्राण नंबर’ (NPS) अनिवार्य किए जाने के बाद जिन आरक्षियों का प्राण नंबर जेनरेट नहीं हो पाया था, उन्हें चेक से वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
फिलहाल 14 जिलों में ऐसी गड़बड़ी की आशंका है। एजी ऑफिस और वित्त विभाग के अधिकारी इसकी जांच में जुट गए हैं। जांच की जद में कई और एसपी व डीएसपी (डीडीओ) भी हैं। जांच में पता चला है कि सप्लायर से लेकर अन्य लोगों को किए गए भुगतान में भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। वर्ष 2016-17 से ऐसे भुगतान लगातार हो रहे हैं।
बोकारो में डेटा डिलीट तो कई मामले में रिकॉर्ड गायब
ट्रेजरी घोटाला उजागर होने के बाद पुलिस विभाग के अंदरूनी सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में पता चला है कि वेतन निकासी से जुड़े रिकॉर्ड और खाते के डेटा से छेडछाड़ की गई है। इसमें एसपी ऑफिस से जुड़े सिस्टम भी जांच के दायरे में हैं। बोकारो में तो डेटा ही डिलीट कर दिया गया है, जबकि कुछ मामलों में रिकॉर्ड मिसिंग या बदला हुआ पाया गया है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन खातों के डेटा को जान-बूझकर हटाया या छिपाया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डेटा में छेड़छाड़ और रिकॉर्ड गायब होना इस घोटाले की सबसे अहम कड़ी है। किसी एसपी ऑफिस का यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया है।
हालांकि फिलहाल किसी एसपी पर सीधे आरोप तय नहीं हुए हैं, लेकिन गड़बड़ी को देखते हुए जांच का दायर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकता है। क्योंकि अब इसकी भी जांच होगी कि डीआई बजट कार्यालय से लेकर डीडीओ ऑफिस में ट्रेजरी कोड का कितना उल्लंघन होता था।
हजारीबाग पहुंची एसआईटी, थाने से ली जब्त सामग्री, अब आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी शुरू
रांची : हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) मंगलवार को हजारीबाग के लौहसिंघना थाना पहुंची। टीम ने एफआईआर के साथ जमा किए गए दस्तावेज और आरोपियों से जब्त सामग्री को अपने कब्जे में लिया। एसआईटी अब यह पता लगा रही है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर निकाली गई राशि कहां निवेश किया, ताकि उन संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई कर सके।
साथ ही सरकारी धन की वसूली हो सके। एसआईटी को पता चला है कि हजारीबाग से गिरफ्तार सिपाही शंभू कुमार ने इन पैसों का सबसे अधिक निवेश किया है। शंभू कुमार का बिहार के गयाजी जिले के पॉश इलाके एपी कॉलोनी में दो आलीशान मकान बनवाया है और पत्नी काजल कुमारी के नाम पर 18 कट्ठा जमीन खरीदी है। शंभू कुमार के नाम 9 व्यावसायिक और कृषि भूमि है।
इनमें से बोधगया क्षेत्र में 7.84 डिसमिल जमीन भी शामिल है, जो शंभू की पत्नी काजल कुमारी और एक अन्य सहयोगी सोनी देवी के नाम पर है। एसआईटी जल्द ही इस मामले में हजारीबाग से गिरफ्तार शंभू कुमार और बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय से पूछताछ करेगी।
इनकी संपत्ति का पता लगा रही एसआईटी
एसआईटी हजारीबाग से गिरफ्तार आरक्षी रजनीश कुमार सिंह, रजनीश की पत्नी खुशबू सिंह, आरक्षी धीरेंद्र सिंह, बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय और सतीश कुमार की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि आरक्षी रजनीश कुमार सिंह के नाम पर हजारीबाग के मसीपिढ़ी इलाके में दो मंजिला मकान है। वहीं आरक्षी धीरेंद्र सिंह का बिहार के बोधगया में एक बड़ा अपार्टमेंट है।









