सोशल संवाद / जमशेदपुर: मधुसूदन पब्लिक स्कूल के सभागार में “नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023” विषय पर एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग (CBP) प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को NCF-SE 2023 की प्रमुख अवधारणाओं और कक्षा-कक्ष में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से अवगत कराना था। NCF-SE 2023 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप स्कूल शिक्षा में पाठ्यक्रम, शिक्षण और मूल्यांकन को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
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कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय के प्राचार्य सह वेन्यू डायरेक्टर के. नागराजू, एमएसएम के प्राचार्य प्रशांत तिवारी, उप प्राचार्या आरती कोड़वार तथा रिसोर्स पर्सन के. एल. नारायण और साम्पा घोषाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान अतिथियों और रिसोर्स पर्सन का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
शिक्षकों को competency-based learning की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विजन को कक्षा-कक्ष में प्रभावी तरीके से लागू करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। खास तौर पर योग्यता-आधारित मूल्यांकन, Bloom’s Taxonomy, केस-आधारित और स्रोत-आधारित प्रश्नों के साथ-साथ उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विस्तार से चर्चा की गई।
NCF-SE 2023 में competency-based learning और learning outcomes पर विशेष जोर दिया गया है। CBSE भी शिक्षकों के लिए competency-based assessment और NCF-SE 2023 से जुड़े Capacity Building Programmes संचालित करता है।
समूह चर्चा और गतिविधियों में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। समूह चर्चा, विभिन्न गतिविधियों और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से शिक्षकों ने प्रशिक्षण में बताई गई नई शिक्षण एवं मूल्यांकन पद्धतियों को समझा।
प्रतिभागियों ने सीखी गई तकनीकों और पद्धतियों को अपने दैनिक शिक्षण कार्य तथा विद्यार्थियों के मूल्यांकन में प्रभावी रूप से अपनाने का संकल्प लिया।
रिसोर्स पर्सन को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य के. नागराजू और उप प्राचार्या आरती कोड़वार ने दोनों रिसोर्स पर्सन को उपहार देकर सम्मानित किया। हिंदी शिक्षक खिरोद महतो ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम का संचालन कंप्यूटर शिक्षिका कविता प्रधान ने किया। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से शिक्षकों को नई शिक्षा पद्धतियों को समझने और उन्हें कक्षा-कक्ष में प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।











