Responsive Full Width Slider
Advertisement 1
Advertisement 2

केंद्र सरकार जाति जनगणना कराएगी:मूल जनगणना के साथ ही होगी, मोदी कैबिनेट का फैसला

By Riya Kumari

Published :

Follow
Central government will conduct caste census
Srinath Advertisement
Dayal Advertisement

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क : केंद्र सरकार जाति जनगणना कराएगी। यह फैसला बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि जाति जनगणना, मूल जनगणना में ही शामिल होगी। जनगणना इस साल सितंबर से शुरू की जा सकती है। इसे पूरा होने में एक साल लगेगा। ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में आएंगे। हालांकि जनगणना कब से शुरू होगी, इसके बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा है। 2021 में जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था। जनगणना आमतौर पर हर 10 साल में की जाती है।

यह भी पढ़े : हम आशा करते हैं अब शीघ्र मनीष सिसोदिया एवं सत्येंद्र जैन की भूमिका साफ होकर इनकी गिरफ्तारी होगी – वीरेन्द्र सचदेवा

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा- कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा जाति जनगणना का विरोध किया

Sunrise Enclave
ASL Motors and Dilip Kia

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, ‘1947 से जाति जनगणना नहीं की गई। कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा जाति जनगणना का विरोध किया। 2010 में दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह सिंह ने कहा था कि जाति जनगणना के मामले पर कैबिनेट में विचार किया जाना चाहिए। इस विषय पर विचार करने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की सिफारिश की। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने जाति का सर्वेक्षण या जाति जनगणना कराने का फैसला नहीं किया।

उन्होंने कहा कि यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। कुछ राज्यों ने यह अच्छा किया है, कुछ अन्य ने केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से गैर-पारदर्शी तरीके से ऐसे सर्वेक्षण किए हैं। ऐसे सर्वेक्षणों ने समाज में संदेह पैदा किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राजनीति से हमारा सामाजिक ताना-बाना खराब न हो, सर्वेक्षण के बजाय जाति गणना को जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 246 के अनुसार, जनगणना का विषय सातवीं अनुसूची की संघ सूची में 69वें नंबर पर सूचीबद्ध है, जो इसे संघ का विषय बनाता है। जबकि कुछ राज्यों ने जाति-आधारित सर्वेक्षण किए हैं, लेकिन दृष्टिकोण में काफी भिन्नता रही है। कुछ मामलों में, ये सर्वेक्षण पारदर्शी और संगठित तरीके से किए गए हैं, जबकि अन्य में वे राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए दिखे।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

Social Samvad Creator