सोशल संवाद/डेस्क: आज के समय में Smartphone और Laptop हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई या मनोरंजन, इन डिवाइसों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि इन्हें रोजाना चार्ज करने से आखिर कितनी बिजली खर्च होती है और इसका बिजली बिल पर कितना असर पड़ता है।
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Smartphone चार्ज करने में कितनी बिजली लगती है?
अधिकांश Smartphone चार्जर 20W से 45W के बीच होते हैं। एक सामान्य फोन को पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 1.5 से 2 घंटे का समय लगता है। ऐसे में एक बार फोन चार्ज करने में करीब 0.03 से 0.06 यूनिट (kWh) बिजली खर्च होती है। पूरे महीने रोज एक बार चार्ज करने पर खपत लगभग 1 से 2 यूनिट तक रहती है।
Laptop चार्ज करने में कितनी बिजली खर्च होती है?
सामान्य Laptop चार्जर 45W से 100W तक के होते हैं, जबकि हाई-परफॉर्मेंस या गेमिंग लैपटॉप में यह क्षमता इससे अधिक भी हो सकती है। यदि लैपटॉप को रोजाना एक बार पूरी तरह चार्ज किया जाए, तो महीनेभर में इसकी बिजली खपत औसतन 3 से 8 यूनिट के बीच हो सकती है।
क्या इससे बिजली का बिल बहुत बढ़ जाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल स्मार्टफोन और लैपटॉप चार्ज करने से बिजली का बिल बहुत अधिक नहीं बढ़ता। यदि आपके क्षेत्र में बिजली की दर 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट है, तो दोनों डिवाइस मिलाकर महीने का खर्च आमतौर पर 30 से 70 रुपये के आसपास हो सकता है। वास्तविक खर्च डिवाइस की बैटरी क्षमता, चार्जर की वाट क्षमता और उपयोग के तरीके पर निर्भर करता है।
बिजली बचाने के आसान उपाय
- डिवाइस पूरी तरह चार्ज होने के बाद चार्जर को प्लग से निकाल दें।
- हमेशा कंपनी द्वारा दिए गए या प्रमाणित चार्जर का ही उपयोग करें।
- जरूरत न होने पर लैपटॉप और फोन को लगातार चार्जिंग पर न रखें।
- बैकग्राउंड में चलने वाले अनावश्यक ऐप्स बंद रखें, इससे बैटरी कम खर्च होगी और चार्जिंग की जरूरत भी कम पड़ेगी।
Smartphone और Laptop को नियमित रूप से चार्ज करने से बिजली की खपत होती है, लेकिन यह आमतौर पर बहुत कम होती है। सही चार्जिंग आदतें अपनाकर न सिर्फ बिजली की बचत की जा सकती है, बल्कि डिवाइस की बैटरी लाइफ भी लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है।










