सोशल संवाद / डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत तेजी से दुनिया के बड़े बाजारों में अपनी जगह बना रहा है। OpenAI के लिए भारत अब सबसे बड़ा बाजार बन गया है। कंपनी के भारत में मैनेजिंग डायरेक्टर प्रभजीत सिंह के मुताबिक, साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स (Weekly Active Users) के मामले में भारत ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। खास बात यह है कि जनवरी 2026 से भारत में ChatGPT का यूजर बेस दोगुना हो चुका है।
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प्रभजीत सिंह ने द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। जून में OpenAI के भारत के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किए जाने के बाद यह उनका पहला इंटरव्यू था। उन्होंने बताया कि भारत में लोग अब ChatGPT का इस्तेमाल केवल सामान्य सवालों के जवाब पाने के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई, कामकाज और दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी कर रहे हैं।
भारत बना ChatGPT का सबसे बड़ा बाजार, अमेरिका को छोड़ा पीछे
OpenAI के मुताबिक, भारत में ChatGPT का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी के साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स में वे सभी लोग शामिल हैं, जो सप्ताह में कम से कम एक बार ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं। इसमें फ्री और पेड दोनों तरह के यूजर्स शामिल हैं।
इससे पहले फरवरी 2026 में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने बताया था कि भारत में ChatGPT के 10 करोड़ से अधिक साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स हैं। उस समय भारत कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार था। अब प्रभजीत सिंह के अनुसार, भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुंच गया है।
सस्ते प्लान और फ्री सब्सक्रिप्शन से बढ़े यूजर्स
भारत में ChatGPT की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कम कीमत वाले प्लान और स्थानीय स्तर पर कंपनी की मौजूदगी को अहम वजह माना जा रहा है। OpenAI ने अगस्त 2025 में ChatGPT Go प्लान लॉन्च किया था। इसकी कीमत प्रीमियम प्लान की तुलना में काफी कम रखी गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीय यूजर्स AI का इस्तेमाल कर सकें।
इसके बाद 4 नवंबर 2025 से भारत में नए साइनअप करने वाले यूजर्स के लिए ChatGPT Go का एक साल का मुफ्त ऑफर भी शुरू किया गया।
कंपनी ने दिल्ली-NCR में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलने की योजना बनाई और आगे मुंबई तथा बेंगलुरु में भी कार्यालय स्थापित करने की घोषणा की। इन कदमों से भारत में कंपनी की पहुंच और विस्तार को गति मिली।
हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं पर OpenAI का खास फोकस
भारत में ChatGPT के विस्तार के सामने भाषा एक बड़ी चुनौती है। देश की बड़ी आबादी अंग्रेजी के बजाय हिंदी और अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में बातचीत करना पसंद करती है। OpenAI के इंडिया MD प्रभजीत सिंह ने कहा कि कंपनी अब हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में AI के इस्तेमाल को आसान बनाने पर ध्यान दे रही है।
इसके लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है:
- भारतीय भाषाओं में वॉयस सपोर्ट को बेहतर बनाना।
- कम मेमोरी वाले एंट्री-लेवल Android स्मार्टफोन पर ChatGPT को बेहतर तरीके से चलाना।
- Android यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट डेवलपमेंट को प्राथमिकता देना।
कंपनी का उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी AI की पहुंच बढ़ाना है।
भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
ChatGPT के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत भी बढ़ रही है। इसी दिशा में OpenAI ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के HyperVault डेटा सेंटर कारोबार के साथ साझेदारी की है।
इस साझेदारी के तहत शुरुआती तौर पर 100 मेगावाट कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने की योजना है, जिसे भविष्य में OpenAI के Stargate इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रम के तहत 1 गीगावाट तक बढ़ाया जा सकता है।
इससे भारत में AI सेवाओं के संचालन और डेटा प्रोसेसिंग की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। खासकर बैंकिंग, बीमा और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों के लिए डेटा रेजिडेंसी यानी देश के भीतर डेटा रखने की सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है।
छोटे शहरों के डेवलपर्स भी कर रहे हैं Codex का इस्तेमाल
प्रभजीत सिंह के मुताबिक, भारत में OpenAI के कोडिंग एजेंट Codex का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत इस टूल के बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। खास बात यह है कि Codex का इस्तेमाल केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 शहरों के डेवलपर्स भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके अलावा एंटरप्राइज कंपनियां, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और स्टार्टअप भी AI टूल्स को प्रयोग के स्तर से आगे बढ़ाकर अपने वास्तविक कामकाज में शामिल कर रहे हैं। इस संदर्भ में JioHotstar और Cars24 जैसी कंपनियों का भी उल्लेख किया गया है।
यूजर्स की संख्या बढ़ी, लेकिन कमाई अभी भी चुनौती
भारत में ChatGPT के यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी फ्री प्लान का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यूजर्स की संख्या के मुकाबले कमाई बढ़ाना OpenAI के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत के मोबाइल ऐप बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। सेंसर टावर के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तिमाही में भारत के मोबाइल ऐप बाजार में उपभोक्ता खर्च 345 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
ChatGPT भारत में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले ऐप्स में शामिल रहा। वहीं, Anthropic के AI टूल Claude ने भी भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
OpenAI को उम्मीद है कि भविष्य में यूजर्स को ज्यादा सुविधाएं मिलने के साथ पेड सब्सक्रिप्शन की संख्या भी बढ़ेगी। इसके अलावा कंपनी फ्री और कम कीमत वाले प्लान को सपोर्ट करने के लिए विज्ञापन मॉडल पर भी काम कर रही है।
ChatGPT पर विज्ञापन से भारतीय ब्रांड्स को मिलेगा मौका
OpenAI ने अपने विज्ञापन मॉडल के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। इसके तहत फ्री और Go प्लान के कुछ वयस्क यूजर्स को विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। कंपनी का कहना है कि विज्ञापनदाताओं को यूजर्स की निजी बातचीत और व्यक्तिगत जानकारी का एक्सेस नहीं दिया जाएगा। साथ ही विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे।
भारतीय ब्रांड्स को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए OpenAI ने Razorpay के साथ साझेदारी की है। इस पहल में Tanishq, Fastrack, Traya, Tata Neu, Shaadi.com और अन्य ब्रांड्स के नाम शामिल हैं।
UPI से ChatGPT पर पेमेंट की तैयारी
भारत में ChatGPT के इस्तेमाल को और आसान बनाने के लिए डिजिटल पेमेंट पर भी काम किया जा रहा है। प्रभजीत सिंह ने संकेत दिया है कि UPI और पेमेंट से जुड़ी घोषणाएं आने वाले समय में की जा सकती हैं।
इससे पहले OpenAI, NPCI और Razorpay ने मिलकर एजेंटिक पेमेंट का पायलट शुरू किया था। इसके जरिए यूजर्स ChatGPT के माध्यम से बातचीत करते हुए खरीदारी और भुगतान कर सकेंगे। इस पहल में UPI Reserve Pay और UPI Circle जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया है। BigBasket को शुरुआती मर्चेंट पार्टनर्स में शामिल किया गया था।
AI के लिए स्पष्ट नियम और सुरक्षा जरूरी
प्रभजीत सिंह ने भारत में AI के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए स्पष्ट नियमों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यूजर्स, कंपनियों और डेवलपर्स के बीच भरोसा कायम करना जरूरी है।
OpenAI इस दिशा में सरकारी एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि AI एजेंट्स के संभावित गलत इस्तेमाल से महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखा जा सके।











