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रात में आते हैं तेज खर्राटे? अपनाएं ये आसान Sleeping Tips, मिल सकती है राहत

By Riya Kumari

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रात में आते हैं तेज खर्राटे? अपनाएं ये आसान Sleeping Tips, मिल सकती है राहत

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सोशल संवाद / डेस्क : आजकल खर्राटों (Snoring) की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। खराब लाइफस्टाइल, बढ़ता वजन, गलत स्लीपिंग पोजिशन और नाक या गले से जुड़ी समस्याओं के कारण कई युवा भी रात में खर्राटों की परेशानी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार खर्राटे लेना सिर्फ नींद में बाधा नहीं बनता, बल्कि यह कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।

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क्यों आते हैं खर्राटे?

खर्राटे तब आते हैं जब सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं और सांस लेने के दौरान वायुमार्ग में कंपन पैदा होता है। इससे तेज आवाज उत्पन्न होती है, जिसे खर्राटे कहा जाता है। मोटापा, नाक बंद रहना, एलर्जी, शराब का सेवन और पीठ के बल सोना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

करवट लेकर सोना हो सकता है फायदेमंद

विशेषज्ञों का मानना है कि पीठ के बल सोने से जीभ पीछे की ओर चली जाती है, जिससे सांस का रास्ता संकरा हो सकता है और खर्राटे बढ़ जाते हैं। ऐसे में करवट लेकर सोने की आदत खर्राटों को कम करने में मदद कर सकती है।

वजन नियंत्रित रखना जरूरी

अधिक वजन वाले लोगों में खर्राटों की समस्या अधिक देखी जाती है। गर्दन और गले के आसपास जमा अतिरिक्त फैट वायुमार्ग पर दबाव बढ़ा सकता है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाकर वजन नियंत्रित रखने से राहत मिल सकती है।

सोने से पहले शराब और धूम्रपान से बचें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शराब गले की मांसपेशियों को अधिक रिलैक्स कर देती है, जिससे खर्राटों की संभावना बढ़ जाती है। वहीं धूम्रपान नाक और श्वसन मार्ग में सूजन पैदा कर सकता है। इसलिए सोने से पहले शराब और सिगरेट से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है।

नाक बंद रहने की समस्या को नजरअंदाज न करें

यदि एलर्जी, सर्दी या नाक बंद रहने की समस्या है तो उसका समय पर उपचार कराना जरूरी है। नाक से सांस लेने में परेशानी होने पर व्यक्ति मुंह से सांस लेता है, जिससे खर्राटे बढ़ सकते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से नेजल स्प्रे या अन्य उपचार मददगार हो सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने, अचानक घुटन महसूस होने, दिनभर थकान रहने या अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याएं भी हो रही हैं, तो यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही स्लीपिंग पोजिशन, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर चिकित्सकीय सलाह अपनाकर खर्राटों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अच्छी नींद न केवल शरीर को आराम देती है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है।

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