सोशल संवाद / डेस्क : कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु में किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। धान की कुरुवई फसल के लिए पानी नहीं मिलने से नाराज किसानों ने इस बार ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे किसानों ने अपने शरीर को रेत में दबाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की।
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इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसान संगठन के नेता अय्या कन्नू ने किया। किसानों का कहना है कि अगर जल्द कावेरी का पानी नहीं छोड़ा गया तो कुरुवई धान की फसल सूख जाएगी और हजारों किसान आर्थिक संकट में आ जाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कर्नाटक सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि तमिलनाडु को उसका तय हिस्सा नहीं दिया जा रहा। किसानों का आरोप है कि कर्नाटक केवल बचा हुआ पानी छोड़ रहा है, जबकि समझौते के मुताबिक तमिलनाडु को समय पर पर्याप्त पानी मिलना चाहिए।
अय्या कन्नू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को हर महीने तमिलनाडु के हिस्से का पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, लेकिन इन आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा। उनका दावा है कि कर्नाटक के बांधों में अभी भी 80 टीएमसी से अधिक पानी मौजूद है, फिर भी तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने से इनकार किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में केरल में हुई भारी बारिश के बाद तमिलनाडु के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकता था, जिसे भवानीसागर बांध तक पहुंचाया जा सकता था। लेकिन इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
किसानों ने केंद्र सरकार और दोनों राज्यों की सरकारों से अपील की है कि कावेरी जल विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि अगर समय पर पानी नहीं मिला तो फसल को भारी नुकसान होगा और हजारों किसान प्रभावित होंगे।
कावेरी नदी का जल बंटवारा लंबे समय से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का विषय रहा है। हर साल बारिश कम होने या पानी की कमी की स्थिति में यह विवाद फिर से गहरा जाता है। इस बार भी किसानों की चिंता अपनी फसल को बचाने को लेकर है और इसी वजह से वे अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।









