सोशल संवाद / रांची: झारखंड में JSSC और JPSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नौकरी पर सरकार के फैसले के बाद संकट खड़ा हो गया था।
यह भी पढे : Tata Steel कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, 1 सितंबर से पूरी तरह ऑनलाइन होगा Gate Pass
दरअसल, राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 भर्ती प्रक्रियाओं को स्थगित रखने और 17 पुरानी परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने की जानकारी सामने आई थी।
नियुक्तियां रद्द होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
सरकार के फैसले के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी फैसले को चुनौती दी गई और अदालत से राहत की मांग की गई। इससे पहले मामले की जल्द सुनवाई की मांग भी की गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नियुक्तियां रद्द करने की सरकारी कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। इससे उन कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो सरकार के फैसले से सीधे प्रभावित हुए थे।
JSSC CGL समेत कई भर्तियां विवाद में
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। JSSC CGL परीक्षा भी इस पूरे मामले के केंद्र में रही है। सरकार ने JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द किया है। वहीं, पुरानी भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कराने का फैसला लिया गया है।
सरकार के फैसले के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए। इसी बीच नियुक्त कर्मचारियों की ओर से कानूनी रास्ता अपनाया गया और अब हाईकोर्ट के आदेश से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
45 भर्ती परीक्षाओं पर पड़ा असर
रिपोर्टों के अनुसार, JPSC-JSSC से जुड़ी कुल 45 भर्ती परीक्षाएं इस विवाद से प्रभावित हुई हैं। इनमें 22 परीक्षाएं रद्द, 6 प्रक्रियाएं स्थगित और 17 पुरानी परीक्षाएं जांच के दायरे में रखी गई हैं। सरकार का यह कदम भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के बाद सामने आया।
अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों की नजर आगे की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि रद्द की गई नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अदालत आगे क्या निर्देश देती है।









