सोशल संवाद / लोहरदगा: झारखंड के लोहरदगा जिले से मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करने वाली एक घटना सामने आई है। जहां एक ओर अंधविश्वास के कारण ग्रामीणों ने एक मृतक के शव को कंधा देने से इंकार कर दिया, वहीं थाना प्रभारी ने आगे बढ़कर न सिर्फ शव को अपने कंधे पर उठाया बल्कि उसे श्मशान घाट तक पहुंचाकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी कराई।

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अंधविश्वास के कारण ग्रामीणों ने बनाया दूरी
जानकारी के अनुसार, गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद अंधविश्वास और सामाजिक भ्रांतियों के चलते स्थानीय लोगों ने शव को कंधा देने से मना कर दिया। इससे मृतक के परिजन काफी परेशान हो गए और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बाधित होने लगी।
ग्रामीणों के इस रवैये से इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। मृतक के परिवार के सामने अंतिम संस्कार कराना बड़ी चुनौती बन गया था।
थाना प्रभारी ने पेश की मानवता की मिसाल
स्थिति की जानकारी मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने खुद जिम्मेदारी संभाली। थाना प्रभारी ने शव को अपने कंधे पर उठाया और पुलिसकर्मियों की मदद से श्मशान घाट तक पहुंचाया। इसके बाद अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं।
पुलिस की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि ऐसे समय में पुलिस का यह संवेदनशील चेहरा समाज के लिए प्रेरणादायक है।
अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर समाज में मौजूद अंधविश्वास और कुरीतियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही ऐसी सोच को बदला जा सकता है, ताकि किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक विदाई से वंचित न होना पड़े।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
घटना सामने आने के बाद सोशल Media पर थाना प्रभारी के मानवीय कार्य की जमकर प्रशंसा हो रही है। लोग इसे पुलिस की संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
लोहरदगा की यह घटना अंधविश्वास और मानवता के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है। जहां कुछ लोगों ने अंधविश्वास के कारण शव को कंधा देने से इंकार कर दिया, वहीं थाना प्रभारी ने आगे बढ़कर इंसानियत का फर्ज निभाया और समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।










