सोशल संवाद / डेस्क : NCERT की नई कक्षा 9 की कला शिक्षा पुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा ‘डांसिंग गर्ल’ (Dancing Girl) की तस्वीर को संशोधित रूप में दिखाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने इसे ऐतिहासिक विरासत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ बताते हुए सवाल उठाए हैं।
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मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग 4,500 वर्ष पुरानी यह कांस्य प्रतिमा भारतीय पुरातत्व की सबसे पहचान योग्य धरोहरों में से एक मानी जाती है। नई पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित तस्वीर में प्रतिमा के ऊपरी हिस्से को ढका हुआ दिखाया गया है, जबकि मूल प्रतिमा में ऐसा नहीं है। इस बदलाव को लेकर इतिहासकारों ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री में ऐतिहासिक कलाकृतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक कलाकृति की तस्वीर में बदलाव करने से छात्रों तक गलत संदेश पहुंच सकता है और मूल विरासत की समझ प्रभावित हो सकती है। कुछ इतिहासकारों ने इसे “सेंसरशिप” की तरह बताते हुए कहा कि इससे कलाकृति की प्रामाणिकता पर असर पड़ता है।
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने मामले की समीक्षा की। संस्था ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद पुस्तक के डिजिटल संस्करण और आगामी प्रिंट संस्करणों में ‘डांसिंग गर्ल’ की मूल तस्वीर को बहाल किया जाएगा।
गौरतलब है कि ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा मोहनजोदड़ो में 1920 के दशक की खुदाई के दौरान मिली थी और इसे सिंधु घाटी सभ्यता की कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतिमा वर्षों से इतिहास और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में शामिल रही है।
क्या है पूरा विवाद?
- नई NCERT कला पुस्तक में प्रतिमा की तस्वीर संशोधित रूप में दिखाई गई।
- इतिहासकारों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ बताया।
- सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक बहस छिड़ी।
- आलोचनाओं के बाद NCERT ने मूल तस्वीर बहाल करने का फैसला लिया।
मोहनजोदड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’ केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और कला कौशल का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में इतिहास और संस्कृति से जुड़ी सामग्री को उसके मूल स्वरूप में प्रस्तुत करने की मांग लगातार उठ रही है। NCERT द्वारा मूल तस्वीर बहाल करने का फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









