सोशल संवाद / डेस्क : India-Bangladesh सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल में बाड़बंदी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन उपलब्ध कराए जाने के बाद कई संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्य को गति मिली है। इस परियोजना का उद्देश्य सीमा पर निगरानी मजबूत करना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करना है।
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172.6 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग की योजना
रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नौ सीमावर्ती जिलों में कुल 1,024.75 एकड़ जमीन BSF को सौंपी गई है। इस जमीन पर लगभग 172.6 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में बाड़बंदी और संबंधित सुरक्षा ढांचे के निर्माण की योजना है। इसमें मुर्शिदाबाद, मालदा, नदिया, कूचबिहार और उत्तर 24 परगना जैसे जिले शामिल हैं।
मुर्शिदाबाद जिले में बाड़बंदी का बड़ा हिस्सा प्रस्तावित है। यहां नदी, घनी आबादी और सीमा के पास बसे गांवों के कारण निर्माण कार्य में कई चुनौतियां आती हैं।
स्मार्ट फेंसिंग से होगी निगरानी
कुछ संवेदनशील इलाकों में पारंपरिक बाड़ के साथ आधुनिक निगरानी तकनीक जोड़ने की योजना है। इसमें सीसीटीवी कैमरे, थर्मल इमेजर, नाइट-विजन उपकरण, सेंसर और ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनकी मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई में सहायता मिलने की उम्मीद है।
सुंदरबन जैसे नदी और दलदली क्षेत्र में सीमा की निगरानी विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। यहां जलमार्गों, ज्वारीय नालों और मैंग्रोव जंगलों के कारण हर जगह सामान्य बाड़ लगाना आसान नहीं है।
बंगाल में कितनी सीमा पर अब भी बाड़ नहीं?
भारत और Bangladesh के बीच पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई लगभग 2,216.7 किलोमीटर है। अगस्त 2025 में राज्यसभा में दिए गए गृह मंत्रालय के जवाब के अनुसार, इनमें से 1,647.696 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी थी, जबकि 569.004 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ और अन्य सीमा ढांचे का काम बाकी था। इसमें 112.780 किलोमीटर हिस्सा उस समय बाड़ लगाने के लिए गैर-व्यवहार्य श्रेणी में था।
नई परियोजनाओं और जमीन हस्तांतरण से बाकी हिस्सों में काम आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, नदी वाले इलाके, भूमि उपलब्धता और सीमावर्ती बस्तियां निर्माण की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
सीमा सुरक्षा मजबूत करने पर जोर
भारत-Bangladesh सीमा पर बाड़बंदी का उद्देश्य घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा-पार अपराधों पर नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करना है। इसके लिए केंद्र और राज्य प्रशासन के साथ BSF के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।
पश्चिम बंगाल में चल रहे निर्माण कार्य को सीमा सुरक्षा ढांचे के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, पूरी परियोजना कब तक पूरी होगी, इसकी अंतिम समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है।










