सोशल संवाद / डेस्क : दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश के पास इस समय करीब 250 मिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, जो आपात स्थिति में लगभग 7 से 8 सप्ताह तक देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है।
यह भी पढे : मिडिल ईस्ट संकट पर महंगाई का झटका, गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा
ऊर्जा सुरक्षा के लिए तैयार भारत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार दोनों को बढ़ाया है। इन भंडारों की मदद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भी देश में तेल की उपलब्धता बनी रह सकती है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी तरह का संकट सीधे घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में पर्याप्त तेल भंडार होना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का महत्व
भारत ने आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) भी तैयार किए हैं। इन भंडारों को खास तौर पर युद्ध, वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने जैसी परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भंडार भारत को अचानक होने वाले ऊर्जा संकट से बचाने में मदद कर सकता है और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में भी सहायक साबित हो सकता है।
वैश्विक तनाव के बीच अहम तैयारी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत का यह तेल भंडार काफी अहम माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि अगर वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है, तब भी देश में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे।
भारत के पास मौजूद 250 मिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह है। इससे आपात स्थिति में कई सप्ताह तक देश की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।









