सोशल संवाद / नई दिल्ली: भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’ के नारे के साथ समाजवादी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की ओर से किया गया। प्रदर्शन में देश के विभिन्न हिस्सों से समाजवादी कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन नेता, शिक्षक, छात्र और युवा शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने, सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षा के निजीकरण एवं बाजारीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।
राजघाट से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव और भारतीय सोशलिस्ट मंच के सदस्यों ने शिक्षा में सुधार और शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने की शपथ ली।
इसके बाद सभी कार्यकर्ता आचार्य नरेंद्र देव वाटिका पहुंचे, जहां आचार्य नरेंद्र देव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान ‘आचार्य नरेंद्र देव अमर रहें’ और ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाए गए।
देश के कई राज्यों से पहुंचे कार्यकर्ता
जंतर-मंतर पर मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई। प्रदर्शन में जम्मू-कश्मीर, बिहार, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से समाजवादी कार्यकर्ता पहुंचे। दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र-छात्राओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की ओर से तैयार ‘शिक्षा के सौदागर सत्ता छोड़ो’ पर्चे का पाठ किया गया।
शिक्षा के अधिकार को लेकर आंदोलन का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने भारत छोड़ो आंदोलन और उसमें समाजवादियों की भूमिका को याद किया। वरिष्ठ समाजवादी चरण सिंह राजपूत ने कहा कि यदि लोगों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर से आए शाहिद सलीम ने सभी बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। वहीं बिहार के अधिवक्ता बिजेंद्र यादव ने शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन की आवश्यकता जताई।
महाराष्ट्र से आए डॉ. सुरेश गवई ने सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए संघर्ष की बात कही।
निजीकरण और बाजारीकरण के खिलाफ आवाज
यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव की सदस्य वंदना पांडे ने समाजवादी आंदोलन की विरासत से प्रेरणा लेकर अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने की अपील की।
वरिष्ठ समाजवादी विचारक डॉ. प्रेम सिंह ने शिक्षा में उदारीकरण और बाजारीकरण की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण के खिलाफ भी मजबूती से संघर्ष करने की जरूरत है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुजरात के वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता जयंती भाई पांचाल ने देशभर में शिक्षा के अधिकार और शिक्षा सुधार को लेकर आंदोलन खड़ा करने की जरूरत बताई।
शिक्षा को सरकार की प्राथमिकता बनाने की मांग
भारतीय सोशलिस्ट मंच के अध्यक्ष आदित्य कुमार ने कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। उन्होंने शिक्षा को सरकार की प्राथमिकता बनाने के लिए व्यापक दबाव बनाने की जरूरत बताई।
दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े अमर सिंह ने स्वास्थ्य और शिक्षा के राष्ट्रीयकरण की मांग उठाई। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक शशि शेखर ने शिक्षा में बढ़ते बाजारीकरण के खिलाफ व्यापक संघर्ष की जरूरत बताई।
कार्यक्रम का संचालन यूथ सोशलिस्ट इनिशिएटिव के सदस्य डॉ. हिरण्य हिमकर ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और समाजवादी आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा और संघर्ष की विरासत को याद किया गया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने, सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षा के निजीकरण एवं बाजारीकरण को रोकने के लिए देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया गया।
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