सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने ट्रेन से गिरकर एक यात्री की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृतक के पास से रेलवे टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर परिवार का मुआवजा दावा खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने रेलवे को मृतक के परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मुआवजा आवेदन दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया गया है।
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यह फैसला न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 27 अक्टूबर 2026 को सुनाया। मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के रहने वाले बनमाली गोप की ट्रेन से गिरकर हुई मौत से जुड़ा है।
2017 में टाटा-बड़बिल पैसेंजर से गिरकर हुई थी मौत
मामले के अनुसार, 1 सितंबर 2017 को बनमाली गोप झिंकपानी रेलवे स्टेशन से केंडपोसी जाने के लिए टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। परिवार की ओर से अदालत को बताया गया कि ट्रेन में काफी भीड़ थी और बनमाली कोच के दरवाजे के पास खड़े थे। यात्रियों की धक्का-मुक्की के दौरान वह ट्रेन से नीचे गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
परिवार का कहना था कि बनमाली के भाई हरिश गोप ने यात्रा के लिए टिकट खरीदा था। हादसे में शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और टिकट बरामद नहीं हो सका।
टिकट नहीं मिलने पर ट्रिब्यूनल ने खारिज किया था दावा
मृतक की पत्नी बैजयंती गोप ने रेलवे से मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने 12 सितंबर 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि मृतक के पास से टिकट बरामद नहीं हुआ और उसके यात्री होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
इसके बाद परिवार ने ट्रिब्यूनल के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा- केवल टिकट नहीं मिलने से दावा खारिज नहीं हो सकता
हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों पर विचार किया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य से यह साबित होता है कि बनमाली ट्रेन में यात्रा कर रहे थे और उनकी मौत दुर्घटनावश ट्रेन से गिरने के कारण हुई थी।
अदालत ने कहा कि केवल मृतक के शरीर से टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज करना उचित नहीं है। रेलवे दुर्घटना से जुड़े मामलों में कानून की व्याख्या संकीर्ण और तकनीकी तरीके से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में आम और आर्थिक रूप से कमजोर लोग रेल यात्रा पर निर्भर हैं।
पत्नी, मां और दो बच्चों को मिलेगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द करते हुए मृतक के परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। इस राशि पर दावा आवेदन दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मुआवजे से मृतक की पत्नी बैजयंती गोप, मां जेमा गोदिन और उनके दो नाबालिग बच्चों को लाभ मिलेगा।










