सोशल संवाद / रांची: झारखंड में कुष्ठ रोग को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में बच्चों में कुष्ठ रोग के 416 नए मामले सामने आए। इनमें 5 बच्चे ग्रेड-2 दिव्यांगता तक पहुंच गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाए तो समय पर इलाज शुरू कर दिव्यांगता से बचाव किया जा सकता है।
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यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब देश 2023-27 के नेशनल स्ट्रेटजिक प्लान के तहत वर्ष 2027 तक जिला स्तर पर कुष्ठ संक्रमण को रोकने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
देश में बच्चों में कुष्ठ के 3,832 नए मामले
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में वर्ष 2025-26 के दौरान बच्चों में कुष्ठ रोग के 3,832 नए मामले दर्ज किए गए। इनमें 37 बच्चे ऐसे थे, जिनमें बीमारी की पहचान होने तक ग्रेड-2 दिव्यांगता विकसित हो चुकी थी। इसे बीमारी की देर से पहचान का संकेत माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में दर्ज नए मामलों की संख्या NLEP के वर्ष के लिए निर्धारित 2,000 मामलों के लक्ष्य से 91.6 प्रतिशत अधिक रही।
देश के कुल बाल कुष्ठ मामलों में झारखंड की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत
देश में सामने आए 3,832 बाल कुष्ठ मामलों में 416 मामले झारखंड के थे। इस तरह कुल मामलों में झारखंड की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत रही। राज्य में सभी आयु वर्गों को मिलाकर वर्ष 2025-26 के दौरान 6,385 नए कुष्ठ रोगी चिह्नित किए गए। इनमें बच्चों की संख्या करीब 6.06 प्रतिशत रही।
झारखंड में 387 मरीज ग्रेड-1, 169 ग्रेड-2 दिव्यांगता तक पहुंचे
झारखंड में कुष्ठ रोग के कुल 6,385 नए मामलों में 387 मरीज ग्रेड-1 दिव्यांगता और 169 मरीज ग्रेड-2 दिव्यांगता तक पहुंच चुके थे।
आंकड़ों के अनुसार:
- ग्रेड-1 दिव्यांगता: 5.64 प्रतिशत
- ग्रेड-2 दिव्यांगता: 2.46 प्रतिशत
ग्रेड-1 और ग्रेड-2 दिव्यांगता का प्रतिशत दोनों ही मामलों में राष्ट्रीय औसत से अधिक रहा। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा क्रमश: 5.45 प्रतिशत और 2.12 प्रतिशत बताया गया है।
झारखंड में प्रीविलेंस रेट राष्ट्रीय औसत से अधिक
कुष्ठ रोग नियंत्रण के लिए प्रति 10 हजार आबादी पर बीमारी की प्रीविलेंस रेट 1 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, झारखंड में यह दर 1.51 दर्ज की गई है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रीविलेंस रेट 0.56 है। यानी झारखंड में यह दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी अधिक है।
नए मामलों की पहचान दर भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा
Annual New Case Detection Rate (ANCDR) के आंकड़ों में भी झारखंड की स्थिति राष्ट्रीय औसत से अधिक है।झारखंड में यह दर प्रति एक लाख आबादी पर 16.19 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ANCDR 6.31 रही। यह आंकड़ा राज्य में नए कुष्ठ मामलों की पहचान की दर को दर्शाता है।
झारखंड में कुष्ठ मरीजों का सामाजिक आंकड़ा
वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में चिह्नित कुष्ठ रोगियों में:
- 1,111 मरीज (16.18%) अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी से थे।
- 2,230 मरीज (32.47%) अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी से थे।
- 2,697 मरीज (39.27%) महिलाएं थीं।
समय पर पहचान से रोकी जा सकती है दिव्यांगता
कुष्ठ रोग का समय पर पता चलने और इलाज शुरू होने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार मरीज को बीमारी के बढ़ने और दिव्यांगता की स्थिति तक पहुंचने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बच्चों में सामने आए 416 नए मामलों और ग्रेड-2 दिव्यांगता वाले पांच मामलों ने शुरुआती पहचान और नियमित जांच की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। वर्ष 2027 तक कुष्ठ संक्रमण को जिला स्तर पर रोकने के राष्ट्रीय लक्ष्य के बीच झारखंड में इन आंकड़ों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।











