सोशल संवाद/डेस्क : पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश संतोष आनंद प्रसाद की अदालत ने सोबेन सामड उर्फ डीबू सामड को दोषी करार देते हुए 21 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
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साथ ही अदालत ने उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
15 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म का मामला
मामला कुमारडुंगी थाना क्षेत्र का है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की मां के बयान पर जनवरी 2024 में कुमारडुंगी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि 15 वर्षीय नाबालिग के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिवार को पूरी बात बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की जांच शुरू हुई।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सोबेन सामड को दोषी माना। इसके बाद कोर्ट ने उसे 21 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।
कुमारडुंगी का रहने वाला है दोषी
दोषी सोबेन सामड उर्फ डीबू सामड पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के तिरिलपी गांव स्थित कोटाचारा टोला का रहने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, वह छह बच्चों का पिता है।
POCSO Act के तहत हुई कार्रवाई
नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में POCSO Act के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है। चाईबासा में भी ऐसे मामलों में विशेष POCSO अदालतों द्वारा सुनवाई की जाती है। झारखंड की आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में भी पश्चिमी सिंहभूम में POCSO मामलों की सुनवाई और दोषसिद्धि के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।









