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National Commission for Men Bill: क्या भारत में बनेगा पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग?

By Nidhi Mishra

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National Commission for Men Bill

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सोशल संवाद/डेस्क : पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड (सिया-केतन केस) के बाद देशभर में पुरुषों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और एक बार फिर ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल’ (National Commission for Men Bill) की आवश्यकता पर जोर दिया।

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डॉ. मित्तल ने कहा कि पुरुष भी अपराध के शिकार हो सकते हैं और उन्हें भी कानूनी सुरक्षा, संस्थागत सहायता तथा अपनी बात रखने के लिए एक प्रभावी मंच मिलना चाहिए। उनके अनुसार न्याय हमेशा लिंग-निरपेक्ष (Gender Neutral) होना चाहिए।

क्या है नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल?

दिसंबर 2025 में राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने ‘पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक, 2025’ को निजी सदस्य विधेयक (Private Member Bill) के रूप में राज्यसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य पुरुषों के अधिकारों की रक्षा करना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और मानसिक स्वास्थ्य, घरेलू विवाद, कानूनी सहायता व सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हालांकि यह विधेयक अभी तक संसद से पारित नहीं हुआ है और संसदीय प्रक्रिया के अधीन है।

आयोग की मांग क्यों उठ रही है?

पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग पिछले कुछ वर्षों में लगातार तेज हुई है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं।

  • पुरुषों से जुड़े मामलों के लिए अलग शिकायत निवारण मंच की मांग।
  • मानसिक स्वास्थ्य और बढ़ती आत्महत्या के मामलों पर विशेष ध्यान।
  • पारिवारिक विवाद और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में निष्पक्ष सुनवाई की मांग।
  • रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी सहायता जैसे मुद्दों पर संस्थागत सहयोग।
  • जेंडर जस्टिस के तहत पुरुषों और महिलाओं दोनों के अधिकारों में संतुलन की आवश्यकता।

सुप्रीम कोर्ट का क्या रहा रुख?

जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने विवाहित पुरुषों की आत्महत्या और पुरुष आयोग की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसे मुद्दों को एकतरफा दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता और लैंगिक न्याय के व्यापक परिप्रेक्ष्य में विचार करना आवश्यक है।

आयोग बनने पर क्या होंगे संभावित कार्य?

यदि भविष्य में पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन होता है, तो इसके संभावित कार्यों में शामिल हो सकते हैं—

  • पुरुषों की शिकायतों की सुनवाई और समाधान।
  • पुरुषों से जुड़े कानूनों और नीतियों की समीक्षा।
  • मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • पुरुषों के अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चलाना।
  • सरकार को नीति संबंधी सुझाव देना।

क्या दूसरे देशों में भी हैं ऐसे संगठन?

कई देशों में पुरुषों से जुड़े अधिकारों और कल्याण के लिए विभिन्न संस्थाएं और संगठन सक्रिय हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों के स्वास्थ्य और कल्याण पर केंद्रित कई सरकारी व गैर-सरकारी कार्यक्रम संचालित हैं।
  • यूनाइटेड किंगडम (UK) में पुरुषों के अधिकारों पर काम करने वाले कई एडवोकेसी समूह सक्रिय हैं।
  • अमेरिका में National Coalition for Men जैसे संगठन पुरुषों के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक कानून से जुड़े मामलों पर काम करते हैं।
  • कनाडा और न्यूजीलैंड में भी पुरुषों के कल्याण के लिए कई सामाजिक संगठन कार्यरत हैं, हालांकि वहां भारत की तरह अलग राष्ट्रीय आयोग नहीं है।

हाल के चर्चित मामलों से बढ़ी बहस

केतन अग्रवाल केस के अलावा हाल के वर्षों में कुछ अन्य चर्चित मामलों ने भी इस बहस को तेज किया है। इनमें इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड और मेरठ का चर्चित ब्लू ड्रम मर्डर केस शामिल हैं। इन मामलों के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर पुरुषों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हुई।

निष्कर्ष

पुरुषों के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग पर देश में अलग-अलग मत हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे पुरुषों की शिकायतों के समाधान और कानूनी सहायता के लिए एक संस्थागत मंच मिलेगा, जबकि विरोधी पक्ष का मानना है कि मौजूदा संस्थागत ढांचे को और प्रभावी बनाना अधिक जरूरी है।

फिलहाल ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल, 2025’ संसद में लंबित है और इसके भविष्य पर अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारत में पुरुषों के अधिकारों और लैंगिक न्याय से जुड़ी बहस को नई दिशा मिल सकती है।

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