सोशल संवाद / घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय में शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया गया। इस दौरान ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ‘सशक्त भारत, समृद्ध भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में सरदार पटेल के अद्वितीय नेतृत्व, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वतंत्र भारत की रियासतों के एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया।
कुलपति ने राष्ट्रीय एकता को बताया भारत की सबसे बड़ी शक्ति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल महान राष्ट्रनिर्माता थे। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति से स्वतंत्र भारत की रियासतों को एक सूत्र में पिरोने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भारत की भाषायी, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, नैतिकता, अनुशासन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की अपील की।
डॉ. शिवचन्द्र झा ने राष्ट्रीय एकता को बताया राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला
राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कहा कि सरदार पटेल का व्यक्तित्व राष्ट्रीय एकता, दृढ़ नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है। रियासतों के एकीकरण के माध्यम से उन्होंने भारत की राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत आधार प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता केवल किसी विशेष दिवस पर लिया जाने वाला संकल्प नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के विचारों, व्यवहार और कर्तव्यों में दिखाई देने वाला जीवनमूल्य है। संविधान के आदर्शों, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और सभी समुदायों के प्रति समान सम्मान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
कुलसचिव ने सामाजिक सद्भाव और नागरिक कर्तव्यों पर दिया बल
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की स्थिरता, प्रगति और समृद्धि का मूल आधार है। भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति हमें एक-दूसरे की भाषाओं, परंपराओं और विचारों का सम्मान करना सिखाती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, मानवीय संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक चेतना का विकास करना भी है। अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूकता ही सशक्त समाज का आधार है।
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र सर्वोपरि’ को प्रत्येक नागरिक के जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
उन्होंने कहा कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना आवश्यक है। विकसित भारत @2047 का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक का सामूहिक संकल्प होना चाहिए।
डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने दिया सांस्कृतिक एकता का संदेश
कार्यक्रम का मंच संचालन बंगला विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने किया। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है। भाषाएं और संस्कृतियां अनेक हो सकती हैं, लेकिन भारतीयता का भाव सभी को एक सूत्र में जोड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान, सहिष्णुता और संवेदनशीलता रखने की अपील की।
राष्ट्रीय एकता की शपथ लेकर लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान सहायक कुलसचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने तथा देशवासियों के बीच सद्भाव और भाईचारे की भावना मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास पर जोर दिया गया। अंत में संदेश दिया गया कि भारत की विविधता उसकी पहचान, एकता उसकी शक्ति और सामाजिक समरसता उसकी ऊर्जा है।










