सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधारों को संस्थागत रूप देने और तकनीकी बदलावों की वकालत की। अदालत ने उदाहरण देते हुए एनटीए से कहा कि प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा तय करने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी परीक्षा प्रणाली की जरूरत है।
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अदालत ने कहा कि यूपीएससी लगातार परीक्षाएं आयोजित करते हुए संस्थागत अनुभव और विशेषज्ञता विकसित कर रहा है। जिस संस्था को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है, उसे भी लगातार खुद को उन्नत करते हुए एक जीवंत संस्था के रूप में विकसित होना चाहिए।
पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है कि एनटीए मजबूत और सक्रिय संस्था के तौर पर काम करे और क्षेत्र से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ इसके लिए काम करें। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि यदि एनटीए को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता है तो अनुभवी लोगों का तबादला हो जाएगा और सारा – अनुभव बेकार चला जाएगा। भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गएः सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि एनटीए में नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं। इस पर पीठ ने जानना चाहा कि कितने अधिकारी नियुक्ति किए गए हैं, क्या उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है।
सुरक्षित कार्यालय की जरूरतः
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनटीए को सुरक्षित ऑफिस की जगह और एक सही संस्थागत ढांचा की जरूरत है।
वैज्ञानिक तरीके अपनाने होंगेः जस्टिस नरसिम्हा
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने परीक्षा प्रणाली को लेकर सुरक्षा उपायों की जो जानकारी दी है, उस पर राधाकृष्णन समिति पहले ही विचार कर चुकी है। अदालत के समक्ष मुद्दा सिर्फ यह नहीं था कि किसी खास परीक्षा के लिए सुरक्षा उपाय मौजूद थे या नहीं, बल्कि यह भी था कि क्या उनको एक टिकाऊ संस्थागत बनाया गया था।









