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एमजीएम अस्पताल में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में लापरवाही, दो क्लर्कों के वेतन पर रोक

By Tamishree Mukherjee

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एमजीएम अस्पताल

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में बदइंतजामी इस कदर हावी है कि यहां न केवल जीवित मरीजों का इलाज मुश्किल है, बल्कि जन्म और मृत्यु के कागजात बनवाने के लिए भी परिजनों को एड़ियां रगड़नी पड़ रही हैं। सोमवार को डीसी कर्ण सत्यार्थी के औचक निरीक्षण में अस्पताल प्रबंधन के दावों की न केवल हवा निकल गई, बल्कि भारी वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के मामले भी सामने आए।

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निरीक्षण के दौरान अस्पताल उपाधीक्षक डॉ जुझार मांझी ने दावा किया था- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर जारी हो रहे हैं। लेकिन जब डीसी सीधे संबंधित सेल (कोषांग) पहुंचे तो सुबह 10:45 बजे तक हेड क्लर्क जयराम महतो और क्लर्क रविंद्र मार्डी अपनी कुर्सी से गायब थे। डीसी ने तुरंत तुरंत दोनों कर्मचारियों के के वेतन निकासी पर रोक लगाने का आदेश दिया। कहा- जब तक 100% पेंडिंग प्रमाण पत्र क्लियर नहीं होते, दोनों कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिलेगी।

सप्लाई का खेल : अस्पताल की ऑक्सीजन प्लांट: 20 गुना महंगी

उदासीनता का आलम यह है कि कोरोना काल से लंबित लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट आज तक शुरू नहीं हो पाया। वर्तमान में सिलेंडर के जरिए ऑक्सीजन आपूर्ति हो रही है, जिसकी लागत एलएमओ के मुकाबले 15 से 20 गुना अधिक है। इसमें भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए डीसी ने कड़ी नाराजगी जताई और तुरंत प्लांट चालू करने का अल्टीमेटम दिया। की समीक्षा बैठक में पता चला वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आवंटित मुख्यमंत्री आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल ही नहीं हुआ। अस्पताल के 21 विभागाध्यक्षों को मरीजों की सुविधा और जरूरी उपकरणों के लिए 5-5 लाख रुपए दिए गए थे।

एमजीएम में 10 बेड का कैंसर वार्ड खोला जाएगा

एमजीएम कॉलेज के प्राचार्य व अस्पताल के अधीक्षक डॉ बलराम झा ने सोमवार को बैठकर की। इसमें कहा गया कि एमजीएम अस्पताल के सातवें तल्ले पर 10 बेड का कैंसर वार्ड खोला जाएगा। जगह का चयन किया गया है। वार्ड में लगने वाले उपकरणों की खरीदारी करने के साथ ही डॉक्टरों, नसों व कर्मचारियों की नियुक्ति करने के लिए कार्य किया जा रहा है। प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल में जल्द वार्ड शुरू होने से कैंसर के मरीजों का इलाज यहीं हो सकेगा। उनको रांची रिम्स या दूसरे अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल के सफाईकर्मियों को निर्देश दिया गया कि हर दो घंटे में प्रसव केंद्र, इमरजेंसी वार्ड की सफाई करें।

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