सोशल संवाद / डेस्क : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों को लेकर दायर सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने गृह मंत्रालय (MHA) के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें ट्रस्ट की स्थापना के लिए सरकार द्वारा अनुमोदित योजना और संबंधित आदेशों की प्रतियां उपलब्ध कराने से इनकार किया गया था।
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आयोग ने माना कि मांगी गई जानकारी संवेदनशील प्रकृति की है और इसके सार्वजनिक होने से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर सूचना देने से इनकार को बरकरार रखा गया।
क्या था पूरा मामला?
आरटीआई आवेदक नीरज शर्मा ने 5 फरवरी 2020 को जारी अधिसूचना के तहत गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना से संबंधित सरकार द्वारा अनुमोदित योजना की प्रमाणित प्रति और संबंधित सरकारी आदेशों की मांग की थी। गृह मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील दायर की।
गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
18 जून 2024 को हुई सुनवाई में गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट की स्थापना से जुड़े सभी दस्तावेज और योजना ‘गोपनीय फाइल’ में सुरक्षित रखे गए हैं।
मंत्रालय का तर्क था कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और यदि इन दस्तावेजों का खुलासा किया जाता है तो इससे संबंधित व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जी) के तहत जानकारी देने से इनकार किया गया।
CIC ने क्यों बरकरार रखा मंत्रालय का फैसला?
तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समरिया ने गृह मंत्रालय की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा उचित उत्तर दिया जा चुका है और इस मामले में आयोग के आगे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद आयोग ने अपील का निस्तारण करते हुए सूचना उपलब्ध कराने से इनकार के फैसले को बरकरार रखा।
क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट RTI के दायरे में आता है?
एक अन्य आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) के तहत “सार्वजनिक प्राधिकरण” (Public Authority) नहीं है। गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है, जिस पर केंद्र या राज्य सरकार का न तो प्रशासनिक नियंत्रण है और न ही उसे सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
ट्रस्ट की ओर से क्या दलील दी गई?
ट्रस्ट की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि इसका गठन सरकार की किसी अधिसूचना के तहत नहीं हुआ, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट विलेख (Trust Deed) के माध्यम से किया गया।
साथ ही यह भी कहा गया कि ट्रस्ट को सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती, इसलिए इसे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।
आयोग ने अपने फैसले में क्या कहा?
केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में किया गया था और उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि ट्रस्ट सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्तपोषण में संचालित होता है।
इसी आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट RTI अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता और इसलिए उस पर आरटीआई कानून के प्रावधान लागू नहीं होंगे।










