सोशल संवाद/डेस्क : मध्य पूर्व में Iran और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई देशों में आशंका जताई जा रही थी कि इस संघर्ष का असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा और पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। लेकिन भारत के लिए इस बीच राहत भरी खबर सामने आई है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित बनी हुई है।
ऊर्जा सुरक्षा पर मजबूत तैयारी
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत किया है। देश ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को बढ़ाकर आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाया है। पहले भारत का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाले तेल पर निर्भर था।
लेकिन अब सरकार ने वैकल्पिक मार्गों और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने की दिशा में काम किया है। हाल के समय में इन नए स्रोतों से तेल आयात लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इस रणनीति का असर यह हुआ कि होर्मुज के बाहर से आने वाले तेल की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। इससे किसी एक रास्ते पर निर्भरता कम हुई है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।
पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास इस समय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव का असर तुरंत घरेलू कीमतों पर नहीं पड़ रहा है।सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तब भी देश में ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त तैयारी की गई है।
एलपीजी और एलएनजी की स्थिति
रसोई गैस यानी एलपीजी को लेकर भी सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। पिछले कुछ समय से एलपीजी के स्टॉक को लेकर कुछ चिंताएं जरूर सामने आई थीं, लेकिन अब उत्पादन और सप्लाई की प्राथमिकताओं में बदलाव कर स्थिति को संतुलित किया जा रहा है।
प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी के मामले में भी भारत मजबूत स्थिति में है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण कतर की एक प्रमुख उत्पादन इकाई अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थी, लेकिन कतर ने भारत को भरोसा दिया है कि सप्लाई रूट खुलते ही गैस की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा कई अन्य देशों ने भी भारत को एलएनजी सप्लाई करने के प्रस्ताव दिए हैं, जिससे भविष्य में भी गैस की कमी की आशंका कम हो जाती है।
कृषि और उद्योग पर असर नहीं
प्राकृतिक गैस का उपयोग देश में उर्वरक उत्पादन में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए गैस सप्लाई को लेकर उर्वरक मंत्रालय के साथ लगातार उच्च स्तरीय बातचीत की जा रही है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर शुरू हुई आवाजाही
हाल के दिनों में एक और सकारात्मक संकेत मिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। यह बदलाव ईरान के राष्ट्रपति के बयान के बाद देखने को मिला, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि पड़ोसी देशों की ओर से हमला न होने पर जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को कुछ हद तक राहत मिली है।
आम जनता को फिलहाल राहत
कुल मिलाकर मौजूदा परिस्थितियों में सरकार का कहना है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति मजबूत और सुरक्षित है। इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल किसी तरह की बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आम लोगों की जेब पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।









