Responsive Full Width Slider

बदलते मौसम में वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ा, कई वायरस एक साथ सक्रिय; फेफड़ों, आंखों और दिल पर भी पड़ सकता है असर

By Sharia Nasrah

Published :

Follow
बदलते मौसम में वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ा, कई वायरस एक साथ सक्रिय; फेफड़ों, आंखों और दिल पर भी पड़ सकता है असर

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : मौसम में बदलाव के साथ देश के कई हिस्सों में वायरल फीवर और श्वसन संबंधी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान एक नहीं, बल्कि कई तरह के वायरस सक्रिय हो जाते हैं, जिनकी वजह से बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश, आंखों में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

यह भी पढ़े : बरेली में पीजीटी समेत 101 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी

विशेषज्ञों के मुताबिक बदलते मौसम में इन्फ्लूएंजा (Flu), रेस्पिरेटरी सिंशियल वायरस (RSV), एडेनोवायरस और कोविड-19 जैसे वायरस अधिक सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि हर मरीज में सभी वायरस नहीं पाए जाते और संक्रमण की गंभीरता व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा क्षमता पर निर्भर करती है।

इन संक्रमणों के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, लगातार खांसी, नाक बहना, गले में दर्द, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कुछ मामलों में आंखों का लाल होना या कंजंक्टिवाइटिस शामिल हैं। गंभीर स्थिति में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया या सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है, उनमें वायरल संक्रमण के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि दिल पर गंभीर असर अपेक्षाकृत कम मामलों में देखा जाता है और यह सभी मरीजों में नहीं होता।

डॉक्टरों का कहना है कि वायरल संक्रमण होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण पर प्रभावी होती हैं। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन स्तर कम होना, सीने में दर्द या लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कैसे करें बचाव

  • हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यकता होने पर मास्क का उपयोग करें।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और संतुलित भोजन लें।
  • पर्याप्त नींद लेकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें।
  • किसी भी प्रकार के गंभीर लक्षण दिखने पर स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान सतर्कता और समय पर उपचार से अधिकांश वायरल संक्रमणों से बचाव और उनका प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। घबराने की बजाय सावधानी बरतना और लक्षणों को नजरअंदाज न करना ही सबसे बेहतर उपाय है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट