सोशल संवाद / रांची : सरकारी उदासीनता और खराब सड़क से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही समाधान निकाल लिया। रांची जिले के ओरमांझी क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने जनसहयोग और चंदा एकत्र कर जर्जर सड़क की मरम्मत कराई। ग्रामीणों की इस पहल की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और इसे सामुदायिक एकजुटता का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

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वर्षों से खराब सड़क से जूझ रहे थे लोग
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण रोजाना आवागमन में भारी परेशानी हो रही थी। बरसात के मौसम में सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाता था, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता था। इलाके में सड़क की खराब स्थिति को लेकर पहले भी कई बार आवाज उठाई गई थी।
प्रशासनिक पहल नहीं होने पर ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से धन संग्रह करने का निर्णय लिया और सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कराया।
इस अभियान में गांव के युवाओं, बुजुर्गों, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग देकर सड़क को फिर से उपयोगी बनाने में योगदान दिया।
सामूहिक प्रयास बना मिसाल
ग्रामीणों का मानना है कि विकास कार्यों के लिए सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन जरूरत पड़ने पर समाज की भागीदारी भी बदलाव ला सकती है। सड़क निर्माण के बाद अब स्थानीय लोगों को आने-जाने में काफी राहत मिल रही है और वाहन चालकों को भी सुविधा मिल रही है।
क्षेत्र में पहले भी उठता रहा है सड़कों का मुद्दा
ओरमांझी क्षेत्र में सड़कों की खराब स्थिति को लेकर कई बार विरोध-प्रदर्शन और जनआंदोलन देखने को मिले हैं। जर्जर सड़कों और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने समय-समय पर नाराजगी जताई है।
लोगों ने की स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि चंदे से सड़क की मरम्मत अस्थायी समाधान है। क्षेत्र में बेहतर सड़क नेटवर्क और नियमित रखरखाव के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि लोगों को भविष्य में ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
ओरमांझी के ग्रामीणों द्वारा चंदा जुटाकर सड़क की मरम्मत कराना सामाजिक एकता और जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है। यह पहल दिखाती है कि जब समुदाय एकजुट होता है तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव संभव हैं, लेकिन स्थायी विकास के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी और बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता बनी रहती है।










