सोशल संवाद/रांची : झारखंड में ठंड का दौर लगभग गुजर गया। अधिकतर जिलों में अधिकतम पारा 28 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। दिन में गर्मी का अहसास होने लगा। अब शिक्षा विभाग को बच्चों को स्वेटर देने की याद आई है। भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई है।
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हालात ऐसे बने कि पूरी सर्दी में सरकारी स्कूलों के पहली से आठवीं कक्षा के बच्चे बिना स्वेटर के ही स्कूल जाते रहे। क्योंकि स्वेटर और पोशाक की राशि उनके खाते में नहीं पहुंची। जो सक्षम थे, उन्होंने अपने खर्च पर स्वेटर खरीदा, लेकिन अधिकतर बच्चे कड़ाके की सर्दी में बिना स्वेटर के ही पढ़ाई को मजबूर हुए। भास्कर ने 15 जिलों की पड़ताल की तो पता चला कि इनमें से पांच जिलों के किसी भी बच्चों को स्वेटर की राशि का भुगतान नहीं हुआ। वहीं 10 जिलों में आंशिक रूप से भुगतान हुआ।
यानी किसी को स्वेटर के पैसे मिले, किसी को नहीं। सिर्फ राजधानी रांची में ही 1.80 लाख बच्चों में से 80 हजार बच्चों को अभी भी स्वेटर की राशि का इंतजार है। वहीं धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, गढ़वा और गुमला समेत कई जिलों में 40 प्रतिशत बच्चों को अभी भी पैसों का इंतजार है। जिला शिक्षा अधीक्षकों का कहना है कि आवंटन देर से मिलने के कारण बच्चों के खाते में स्वेटर के पैसे नहीं भेजे गए। अब भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्दी ही उनके खाते में पैसे चले जाएंगे।
पिछले 2 साल से समय पर मिलते थे पैसे
राज्य में दो साल के बाद ऐसी स्थिति बनी है, जब छात्रों को सर्दी में स्वेटर और पोशाक के पैसे नहीं मिले। इससे पहले जुलाई से दिसंबर तक यह राशि छात्रों के खाते में पहुंच जाते थे। इससे कड़ाके की सर्दी शुरू होने से पहले छात्र स्वेटर खरीद पाते थे। लेकिन इस बार मामला अटक गया। पैसों के अभाव में कड़ाके की सर्दी में भी बच्चों को बिना स्वेटर के ही स्कूल जाना पड़ा।









