सोशल संवाद / रांची : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल Rajendra Institute of Medical Sciences (RIMS) के ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सरायकेला के एक अधिवक्ता की सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मौत हो जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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परिजनों का आरोप है कि गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता को बेहतर इलाज के लिए RIMS ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था, लेकिन उन्हें समय पर भर्ती नहीं किया गया। आरोप है कि इलाज में हुई देरी के कारण उनकी जान चली गई।
झारखंड बार काउंसिल सदस्य ने उठाए सवाल
झारखंड राज्य बार काउंसिल के सदस्य संजय कुमार विद्रोही ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं कई अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से जुड़े लोगों के माध्यम से मदद की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि यदि गंभीर रूप से घायल मरीजों को भी ट्रॉमा सेंटर में तत्काल इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो इसकी व्यवस्था और उद्देश्य पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली पर उठे अहम सवाल
इस घटना के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं
- यदि गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को समय पर भर्ती नहीं किया जा सकता, तो ट्रॉमा सेंटर की उपयोगिता क्या है?
- करोड़ों रुपये की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है?
- क्या 24×7 आपातकालीन सेवा के दावे सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक सीमित हैं?
- आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
संजय कुमार विद्रोही ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि मरीज को भर्ती करने में किस स्तर पर चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भी ट्रॉमा सेंटर की सफलता उसके भवन या संसाधनों से नहीं, बल्कि समय पर इलाज देकर बचाई गई जिंदगियों से मापी जाती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रॉमा केयर सिस्टम की कार्यक्षमता पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और मरीजों को बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।









