सोशल संवाद / डेस्क : बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें 1 दिसंबर तक संबंधित अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया। अदालत ने बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का आदेश भी दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट का जमानत आदेश किया रद्द
अनंत सिंह को इस हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मार्च 2026 में जमानत मिली थी। दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह की जमानत रद्द करने का आदेश दिया।
मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की। अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
चार महीने में जांच पूरी करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। अदालत के इस आदेश के बाद जांच एजेंसी को निर्धारित समयसीमा में अपनी कार्रवाई पूरी करनी होगी।
30 अक्टूबर 2025 को हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार के मोकामा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। इस मामले में अनंत सिंह आरोपी हैं। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था और बाद में पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इसी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। संयोग से सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड की पहली बरसी यानी 30 अक्टूबर को ही अनंत सिंह की जमानत रद्द करने और सरेंडर का आदेश सुनाया।
शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। वहीं, बिहार पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करनी है।










