सोशल संवाद / डेस्क : Assam में इस साल की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश और नदियों के उफान के कारण कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के मध्य तक बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी। वहीं कई इलाकों में घर, सड़कें और खेती की जमीन पानी में डूब गईं।
बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। कई गांवों में पानी भरने के कारण लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है।
Rescue operations में स्थानीय प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमें भी जुटी हुई हैं। नावों के जरिए पानी में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों और जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
Assam के कई हिस्सों में बाढ़ का असर सड़क और सामान्य यातायात पर भी पड़ा है। पानी भरने से कई रास्ते प्रभावित हुए हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना मुश्किल बना हुआ है। खेती और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
इस बीच राहत और पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार की ओर से भी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में Assam सरकार ने 31,951 बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 47.93 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत जारी की। प्रत्येक परिवार को 15,000 रुपये की सहायता DBT के जरिए दी गई।
Assam के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी बाढ़ से हुए नुकसान और आगे की recovery को लेकर केंद्र सरकार से चर्चा की है। 21 अगस्त को उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर बाढ़ की स्थिति, नुकसान और पुनर्निर्माण की योजनाओं पर जानकारी दी। केंद्र की ओर से राज्य को सहायता का भरोसा दिया गया है।
वहीं, बाढ़ की स्थिति को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। Sivasagar के विधायक अखिल गोगोई ने राज्य सरकार की disaster preparedness और relief operations पर सवाल उठाए हैं और प्रशासन की कार्यप्रणाली की आलोचना की है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके अलग-अलग पक्षों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना है। प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित इलाकों में पानी का स्तर, मौसम और नदियों की स्थिति monitor की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।









