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  • भारत का हेल्थकेयर सेक्टर खत्म होने की कगार पर है यह बात भारत की एक पार्लियामेंट्री कमेटी ने भी मानी है।

    भारत का हेल्थकेयर सेक्टर खत्म होने की कगार पर है यह बात भारत की एक पार्लियामेंट्री कमेटी ने भी मानी है।

    सोशल संवाद/डेस्क : प्रमुख न्यूज़ की हाल ही में जारी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में होने वाली लगभग 44% इंसानों की सर्जरी नकली, फ्रॉड या गैर-ज़रूरी होती हैं। इसका मतलब है कि देश में होने वाली लगभग आधी सर्जरी मरीज़ों या सरकार को लूटने के लिए की जाती हैं।

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    रिपोर्ट के मुताबिक:

    हार्ट सर्जरी – 55%

    हिस्टेरेक्टॉमी – 48%

    कैंसर सर्जरी – 47%

    घुटने का रिप्लेसमेंट – 48%

    सिजेरियन डिलीवरी – 45%

    कंधे, रीढ़ की हड्डी, वगैरह और कई दूसरी सर्जरी – नकली या गैर-ज़रूरी होती हैं।

    महाराष्ट्र के कई जाने-माने अस्पतालों पर किए गए एक सर्वे के मुताबिक, बड़े अस्पतालों में सीनियर डॉक्टरों को हर महीने ₹1 करोड़ तक मिलते हैं।

    कारण: जो डॉक्टर ज़्यादा टेस्ट, इलाज, हॉस्पिटल में भर्ती या सर्जरी लिखते हैं, उन्हें ज़्यादा पैसे मिलते हैं चाहे वे ज़रूरी हों या नहीं।

    (सोर्स: BMJ ग्लोबल हेल्थ)

    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हॉस्पिटल मरे हुए मरीज़ों का इलाज ऐसे कर रहे हैं जैसे वे ज़िंदा हों और इलाज के नाम पर उनसे पैसे वसूल रहे हैं यह एक घिनौना काम है। एक घटना में, एक बड़े हॉस्पिटल ने 14 साल के लड़के को एक महीने तक वेंटिलेटर पर रखा, जबकि वह मर चुका था।

    जब बाद में उसे मरा हुआ घोषित किया गया, तो हॉस्पिटल को दोषी पाया गया और परिवार को ₹5 लाख का मुआवज़ा दिया गया लेकिन क्या कोई उनकी मानसिक तकलीफ़ के लिए उन्हें मुआवज़ा दे सकता है?

    कुछ हॉस्पिटल दावा करते हैं कि मरे हुए मरीज़ों को तुरंत सर्जरी की ज़रूरत है, परिवार वालों से पैसे लेते हैं और बाद में कह देते हैं कि वे “ऑपरेशन के दौरान मर गए।”

    इस तरह, बहुत बड़ी रकम लूटी जाती है।

    (सोर्स: डिसेंटिंग डायग्नोसिस – डॉ. गद्रे और डॉ. शुक्ला)

    हेल्थ इंश्योरेंस (मेडिकल क्लेम) फ्रॉड

    यह भी उतना ही डरावना है। वैसे तो भारत में करीब 68% लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर उनके क्लेम या तो रिजेक्ट कर दिए जाते हैं या उनका थोड़ा पेमेंट किया जाता है। बाकी का खर्च परिवार उठाता है। करीब 3,000 जाने-माने हॉस्पिटल को इंश्योरेंस कंपनियों ने नकली क्लेम की वजह से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। कोविड के समय में कई बड़े हॉस्पिटल ने नकली कोविड केस बनाए और इंश्योरेंस कंपनियों को धोखा दिया। ह्यूमन ऑर्गन ट्रैफिकिंग यह बड़े पैमाने पर हो रहा है।

    2019 में इंडियन एक्सप्रेस ने एक घटना का खुलासा किया था कानपुर की संगीता कश्यप नाम की एक महिला को नौकरी का झांसा देकर दिल्ली के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया। उसे “हेल्थ चेकअप” के बहाने फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। खुशकिस्मती से, डॉक्टरों के “डोनर” शब्द का इस्तेमाल करने के बाद वह भाग निकली। उसकी शिकायत के बाद, डॉक्टरों, स्टाफ और पुलिस अधिकारियों से जुड़े एक इंटरनेशनल ऑर्गन ट्रैफिकिंग रैकेट का पर्दाफाश हुआ। हॉस्पिटल रेफरल फ्रॉड कुछ डॉक्टर मरीज़ों को गंभीर बीमारी बताकर बड़े हॉस्पिटल में रेफर कर देते थे। अपोलो, फोर्टिस और एपेक्स जैसे हॉस्पिटल ये रेफरल प्रोग्राम चलाते हैं।

    उदाहरण के लिए, मुंबई के कोकिलाबेन हॉस्पिटल के ऑफर:

    • अगर आप 40 मरीज़ों को रेफर करते हैं, तो आपको ₹1 लाख मिलेंगे,
    • 50 मरीज़ों के लिए, आपको ₹1.5 लाख मिलेंगे,
    • 75 मरीज़ों के लिए, आपको ₹2.5 लाख मिलेंगे।
    • मरीज़ की हालत चाहे जो भी हो रेफरल फीस सीधे डॉक्टर के बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो जाती है।
    • डायग्नोस्टिक टेस्ट फ्रॉड

    यह हज़ारों करोड़ रुपये का बिज़नेस है।

    बेंगलुरु में एक जानी-मानी लैब पर इनकम टैक्स की रेड में, ₹100 करोड़ कैश और 3.5 kg सोना ज़ब्त किया गया ये सब डॉक्टरों को रिश्वत देने के लिए था।

    डॉक्टर गैर-ज़रूरी टेस्ट लिखते थे और 40–50% कमीशन लेते थे।
    ज़्यादातर टेस्ट पेपर-बेस्ड होते हैं। इसीलिए, भारत में 2 लाख से ज़्यादा लैब होने के बावजूद, सिर्फ़ 1,000 ही सर्टिफाइड हैं।

    फार्मास्यूटिकल कंपनियों का करप्शन

    लगभग 20-25 बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनियाँ हर साल डॉक्टरों पर ₹1,000 करोड़ खर्च करती हैं।
    डोलो टैबलेट बनाने वाली कंपनी भी कोविड के दौरान ऐसे ही एक स्कैम में पकड़ी गई थी।

    डॉक्टरों को उनकी दवाएँ लिखने के लिए कैश, विदेश ट्रिप और 5-स्टार होटलों में लग्ज़री स्टे दिया जाता है।
    उदाहरण के लिए, USV Ltd. हर डॉक्टर को ₹3 लाख कैश या ऑस्ट्रेलिया/अमेरिका का टूर देती है।

    हॉस्पिटल – फार्मास्यूटिकल कंपनी रैकेट

    कई कंपनियाँ हॉस्पिटल को कम कीमत पर दवाएँ और इक्विपमेंट बेचती हैं, लेकिन हॉस्पिटल मरीज़ों को उन्हें 10 गुना ज़्यादा कीमत पर बेचते हैं।

    एक उदाहरण
    EMCURE की बनाई कैंसर की दवा टेमिक्योर हॉस्पिटल को ₹1,950 में बेची गई,
    मरीज़ों से ₹18,645 लिए गए।

    मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI)

    2016 की एक रिपोर्ट में, सरकार की बनाई एक कमिटी ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों को मंज़ूरी देने के बावजूद, MCI डॉक्टरों और अस्पतालों पर नज़र रखने में पूरी तरह से नाकाम रही है।

    MCI के नियम (जिनका अक्सर उल्लंघन होता है) में ये शामिल हैं:

    1. डॉक्टरों को सिर्फ़ जेनेरिक दवाएँ लिखनी चाहिए, ब्रांडेड नहीं।
    2. इलाज से पहले फ़ीस की जानकारी बतानी चाहिए।
    3. हर टेस्ट या इलाज से पहले मरीज़ की मंज़ूरी ज़रूरी है।
    4. मरीज़ का रिकॉर्ड कम से कम 3 साल तक स्टोर किया जाना चाहिए।
    5. जो डॉक्टर गलत या नाकाबिल तरीके से काम करते हैं, उनकी रिपोर्ट की जानी चाहिए।

    सरकारी स्कीमों में भ्रष्टाचार

    फ़ायरफ़ाइटर और एक्स-सर्विसमैन जैसे लोग भी सरकारी स्कीमों के तहत फ़र्ज़ी हॉस्पिटल एडमिशन के शिकार होते हैं।

  • चाय (Tea)के फायदे और नुकसान: रोज़ सुबह की आदत है या सेहत के लिए जोखिम?

    चाय (Tea)के फायदे और नुकसान: रोज़ सुबह की आदत है या सेहत के लिए जोखिम?

    सोशल संवाद / डेस्क : चाय (Tea) भारत समेत दुनिया भर में सबसे अधिक पी जाने वाला पेय है। सुबह की पहली घूँट हो या दिन भर एनर्जी बढ़ाने के लिए चाय का सेवन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या चाय सिर्फ स्वाद और ताज़गी देगी, या इसके कुछ नुक़सान भी हैं? आइए विस्तार से जानते हैं चाय के स्वास्थ्य लाभ और संभावित दुष्प्रभाव।

    यह भी पढे : Who Should Avoid Eating Guava: किन लोगों के लिए अमरूद नुकसानदायक हो सकता है?

    चाय (Tea)पीने के मुख्य फायदे

    1. एनर्जी और अलर्टनेस बढ़ाती है

    चाय में मौजूद कैफीन हमारी थकान को कम करता है और दिमाग को अधिक फोकस्ड बनाता है। सुबह-सुबह चाय पीने से दिन की शुरुआत तरोताज़ा होती है।

    2. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

    चाय में पॉलीफेनॉल और फ्लैवोनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो फ्री रेडिकल्स से बचाव करते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रियाओं को धीमा करते हैं।

    3. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

    कुछ शोधों के अनुसार नियमित चाय के सेवन से हृदय रोगों का जोखिम कम होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    4. पाचन में सुधार

    हल्की गर्म चाय पेट को आराम देती है और भोजन के बाद पाचन को बेहतर करती है। कुछ हर्बल चाय पाचन तंत्र को और अधिक मदद देती हैं।

    चाय (Tea)के संभावित नुकसान

    1. ज्यादा कैफीन से होने वाली समस्याएं

    अगर आप बहुत ज्यादा चाय पीते हैं, तो यह नींद में खलल, अनिद्रा, उत्तेजना और दिल की धड़कन में असामान्यता जैसे लक्षण दे सकता है।

    2. आयरन अवशोषण में रुकावट

    चाय में मौजूद कुछ कंपाउंड खून में आयरन के अवशोषण को रोक सकते हैं। इससे एनीमिया जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है, खासकर महिलाओं में।

    3. दांतों पर दाग और पीलेपन का असर

    चाय में मौजूद टैनिन्स दांतों पर नारंगी/भूरे दाग छोड़ सकते हैं। नियमित चाय पीने वालों को दांतों की सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए।

    4. पेट की समस्या

    खाली पेट चाय पीने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन या आंतों की परेशानी हो सकती है।

    चाय (Tea) पीने के लिए सुरक्षित सुझाव

    • रोज़ाना 2–3 कप से अधिक नहीं पीएं।
    • चाय को हल्का रखें अत्यधिक चीनी या मलाई न डालें।
    • अगर आप एनिमिया से ग्रस्त हैं, तो चाय को खाने के तुरंत बाद न पिएं।
    • पानी के साथ चाय का सेवन करें ताकि शरीर में पानी का संतुलन बना रहे।

    चाय एक स्वादिष्ट और ऊर्जावर्धक पेय है जो अगर सही मात्रा में और सही समय पर लिया जाए तो शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ दे सकती है। वहीं, अगर इसका अत्यधिक सेवन किया जाए तो यह स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकती है।

  • Who Should Avoid Eating Guava: किन लोगों के लिए अमरूद नुकसानदायक हो सकता है?

    Who Should Avoid Eating Guava: किन लोगों के लिए अमरूद नुकसानदायक हो सकता है?

    सोशल संवाद / डेस्क : अमरूद (Guava) दिखने में साधारण जरूर है, लेकिन पोषण के मामले में यह सुपरफूड से कम नहीं। इसमें विटामिन C, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

    यह भी पढे : 30 दिन तक रोज 3 लीटर पानी पीने से क्या होता है? जानिए शरीर में होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव

    हालांकि, हर हेल्दी चीज हर किसी के लिए फायदेमंद हो यह जरूरी नहीं। हेल्थ वेबसाइट Medical News Today के अनुसार कुछ लोगों को अमरूद का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए। आइए जानते हैं कि किन लोगों को अमरूद खाने से बचना चाहिए।

    1. जिनका पाचन तंत्र संवेदनशील है या IBS की समस्या है

    अमरूद में फाइबर की मात्रा काफी अधिक होती है। इसके सख्त बीज कई लोगों के लिए पचाना मुश्किल हो सकते हैं।

    • जिन्हें गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) की समस्या रहती है
    • जिन्हें अक्सर पेट दर्द, ऐंठन या दस्त की शिकायत होती है

    उनके लिए ज्यादा फाइबर आंतों में जलन पैदा कर सकता है।

    क्या करें?

    • कम मात्रा में अमरूद खाएं
    • बीज निकालकर सेवन करें
    • कच्चा अमरूद खाने से बचें

    2. डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर वाले लोग

    अमरूद में प्राकृतिक शर्करा (Natural Sugar) मौजूद होती है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ा सकता है।

    • टाइप 2 डायबिटीज के मरीज
    • जिनका ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता-घटता है
    • जो खाली पेट फल खाते हैं

    उन्हें पका हुआ अमरूद या अमरूद का जूस लेने से शुगर स्पाइक का खतरा हो सकता है।

    क्या करें?

    • सीमित मात्रा में खाएं
    • ज्यादा पका हुआ अमरूद न लें
    • डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेकर सेवन करें

    3. जिनको स्किन एलर्जी या एक्जिमा की समस्या है

    कुछ लोगों में अमरूद खाने से:

    • खुजली
    • लाल चकत्ते
    • त्वचा में जलन
    • एक्जिमा बढ़ने जैसी समस्या

    देखी जा सकती है। माना जाता है कि अमरूद शरीर की आंतरिक गर्मी बढ़ा सकता है, जिससे संवेदनशील त्वचा में सूजन बढ़ सकती है।

    अगर अमरूद खाने के बाद बार-बार स्किन रिएक्शन दिखे, तो इसका सेवन सीमित या बंद करना बेहतर है।

    4. जिनको सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या रहती है

    Guava को ठंडी तासीर वाला फल माना जाता है।

    • जिन्हें जल्दी सर्दी-जुकाम हो जाता है
    • जिनको साइनस या गले में खराश रहती है
    • जिनमें बलगम की समस्या रहती है

    उनके लिए खासकर रात में या सर्दियों में अमरूद खाना परेशानी बढ़ा सकता है।

    क्या आपको Guava खाना चाहिए?

    अमरूद बेहद पौष्टिक फल है, लेकिन हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। अगर अमरूद खाने के बाद आपको:

    • पेट दर्द
    • सूजन
    • खुजली
    • गले में खराश
    • ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव

    महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

    अंतिम सलाह

    सेहत का सबसे बड़ा नियम है अपने शरीर के संकेतों को समझें।
    संतुलित मात्रा, सही समय और सही स्थिति में खाया गया अमरूद ही फायदेमंद होता है। किसी भी हेल्थ कंडीशन में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • 30 दिन तक रोज 3 लीटर पानी पीने से क्या होता है? जानिए शरीर में होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव

    30 दिन तक रोज 3 लीटर पानी पीने से क्या होता है? जानिए शरीर में होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव

    सोशल संवाद / डेस्क : Drinking 3 Litres Water Daily Benefits: क्या आप जानते हैं कि अगर आप लगातार 30 दिनों तक रोजाना 3 लीटर पानी पीते हैं, तो आपके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं? एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही मात्रा में पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करने, मेटाबॉलिज्म सुधारने और स्किन हेल्थ बेहतर करने में मदद करता है।  

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    न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक ऐसी हेल्दी जर्नी हो सकती है, जिसमें शरीर खुद को अंदर से रिपेयर और रिकवर करना शुरू कर देता है। आइए जानते हैं हफ्ते दर हफ्ते क्या बदलाव हो सकते हैं।

    पहला हफ्ता: बॉडी डिटॉक्स की शुरुआत

    जब आप अचानक पानी की मात्रा बढ़ाते हैं, तो शुरुआती दिनों में बार-बार पेशाब आना सामान्य है।

    क्या होगा फायदा?

    • किडनी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालना शुरू करती है
    • शरीर में जमा एक्स्ट्रा नमक कम होता है
    • सूजन (Water Retention) में कमी आती है
    • शरीर हल्का महसूस होने लगता है

    कुछ दिनों बाद पेशाब की फ्रीक्वेंसी सामान्य होने लगती है और बॉडी नए रूटीन को अपनाने लगती है।

    दूसरा हफ्ता: स्किन और पाचन में सुधार

    दूसरे हफ्ते तक स्किन में साफ बदलाव नजर आ सकते हैं।

    संभावित फायदे:

    • स्किन ज्यादा हाइड्रेटेड और ग्लोइंग दिखेगी
    • ड्राईनेस कम होगी
    • पाचन क्रिया बेहतर होगी
    • कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है

    इसके अलावा, दिमाग भूख और प्यास के बीच फर्क समझने लगता है, जिससे बेवजह स्नैकिंग कम हो सकती है।

    तीसरा हफ्ता: बेहतर फोकस और मसल रिकवरी

    हमारा खून मुख्य रूप से पानी से बना होता है। पर्याप्त पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई सुधरती है।

    इस हफ्ते के बदलाव:

    • मानसिक फोकस में सुधार
    • थकान में कमी
    • मांसपेशियों की अकड़न कम
    • वर्कआउट के बाद तेजी से रिकवरी

    मसल्स में पानी की पर्याप्त मात्रा लचीलापन बढ़ाने में भी मदद करती है।

    चौथा हफ्ता: ओवरऑल हेल्थ में सुधार

    लगातार 30 दिन तक हाइड्रेटेड रहने से शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है।

    संभावित फायदे:

    • बाल और नाखून मजबूत दिख सकते हैं
    • ब्लड प्रेशर संतुलित रहने में मदद
    • हार्ट पर कम दबाव
    • मेटाबॉलिज्म बेहतर

    फैट बर्निंग में मदद?

    जब शरीर फैट को एनर्जी में बदलता है, तो इस प्रक्रिया को ‘लिपोलिसिस’ (Lipolysis) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में पानी की अहम भूमिका होती है। सही हाइड्रेशन से मेटाबॉलिक प्रोसेस बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं, जिससे वजन घटाने में सहायता मिल सकती है।

    ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

    • 3 लीटर पानी हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है; यह उम्र, वजन और एक्टिविटी लेवल पर निर्भर करता है।
    • जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदेह हो सकता है (Water Intoxication)।
    • किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लें।

    अगर आप 30 दिन तक नियमित रूप से सही मात्रा में पानी पीते हैं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव संभव हैं। बेहतर स्किन, मजबूत पाचन, ज्यादा एनर्जी और बेहतर फोकस जैसे फायदे मिल सकते हैं।

  • Gaming Effects on Brain: ज्यादा गेमिंग से कौन-सा हार्मोन होता है एक्टिव? जानिए फायदे और नुकसान

    Gaming Effects on Brain: ज्यादा गेमिंग से कौन-सा हार्मोन होता है एक्टिव? जानिए फायदे और नुकसान

    सोशल संवाद / डेस्क : आज के डिजिटल युग में वीडियो गेम बच्चों से लेकर बड़ों तक की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल, लैपटॉप और गेमिंग कंसोल पर घंटों खेलना अब आम है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि ज्यादा गेमिंग से दिमाग और शरीर पर क्या असर पड़ता है नुकसान ज्यादा हैं या फायदे भी? वैज्ञानिकों के अनुसार, गेमिंग का सीधा प्रभाव हमारे ब्रेन और हार्मोन सिस्टम पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि गेमिंग के दौरान कौन-सा हार्मोन एक्टिव होता है और शरीर में क्या बदलाव आते हैं।

    यह भी पढे : Early Signs of Brain Hemorrhage: ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण, कारण और बचाव

    गेमिंग और दिमाग का कनेक्शन

    आधुनिक वीडियो गेम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। रंग, साउंड, टास्क, रिवॉर्ड सिस्टम और लेवल-अप जैसे एलिमेंट्स दिमाग को लगातार स्टिम्युलेट करते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गेमिंग के दौरान रिवॉर्ड, इमोशन और डिसीजन-मेकिंग से जुड़े कई ब्रेन एरिया एक साथ एक्टिव हो जाते हैं।

    डोपामिन: गेमिंग का सबसे बड़ा हार्मोन

    गेम खेलते समय सबसे अहम भूमिका डोपामिन की होती है, जिसे “फील-गुड हार्मोन” कहा जाता है। लेवल पूरा करना, जीतना या रिवॉर्ड मिलना इन सब पर दिमाग डोपामिन रिलीज करता है। इससे खुशी और उत्साह बढ़ता है और दोबारा खेलने की इच्छा पैदा होती है।

    हालांकि, अत्यधिक और लगातार गेमिंग से दिमाग जरूरत से ज्यादा डोपामिन रिलीज करने लगता है। समय के साथ दिमाग इसकी आदत बना लेता है और संवेदनशीलता घट जाती है। नतीजतन, पहले जैसी खुशी पाने के लिए ज्यादा गेम खेलना पड़ता है। यही कारण है कि अधिक गेमिंग करने वालों में थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी और ब्रेन फॉग जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

    फाइट या फ्लाइट मोड क्यों हो जाता है एक्टिव?

    एक्शन और फाइटिंग गेम्स खेलते समय शरीर का फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स भी एक्टिव हो सकता है। यह वही सिस्टम है जो खतरे की स्थिति में हमें सतर्क करता है। कई बार दिमाग गेम की परिस्थितियों को असली खतरे जैसा मान लेता है, जिससे बेचैनी, गुस्सा और आक्रामकता बढ़ सकती है। इस दौरान भावनात्मक प्रतिक्रिया हावी हो जाती है और तार्किक सोच कमजोर पड़ सकती है।

    संतुलन ही है समाधान

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित और संतुलित गेमिंग फोकस, रिफ्लेक्स और समस्या-समाधान कौशल को बेहतर बना सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा गेमिंग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए समय तय करें, ब्रेक लें और ऑफलाइन गतिविधियों को भी दिनचर्या में शामिल करें।

    गेमिंग सीधे तौर पर डोपामिन और फाइट फ्लाइट सिस्टम को प्रभावित करती है। सही संतुलन रखा जाए तो फायदे मिलते हैं, वरना नुकसान बढ़ सकते हैं।

  • Early Signs of Brain Hemorrhage: ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण, कारण और बचाव

    Early Signs of Brain Hemorrhage: ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण, कारण और बचाव

    सोशल संवाद / डेस्क : ब्रेन हैमरेज स्ट्रोक का एक बेहद गंभीर और जानलेवा रूप माना जाता है। इसमें दिमाग की किसी ब्लड वेसल के फटने या लीक होने से अंदरूनी रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इस स्थिति में ब्रेन सेल्स तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता, जिससे स्थायी ब्रेन डैमेज या जान का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन हैमरेज एक मेडिकल इमरजेंसी है, इसलिए समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। थोड़ी सी देरी भी स्थिति को गंभीर बना सकती है।

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    ब्रेन हैमरेज कैसे होता है?

    जब दिमाग की कोई नस फटती है, तो खून आसपास के ब्रेन टिश्यू में फैल जाता है। इससे सूजन, ब्लड क्लॉट और दिमाग पर दबाव बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ दबाव ब्रेन के जरूरी फंक्शन जैसे बोलना, चलना, याददाश्त और चेतना को प्रभावित कर सकता है।

    खोपड़ी की भूमिका क्यों अहम है?

    खोपड़ी एक कठोर ढांचा होती है, जिसमें दिमाग के लिए अतिरिक्त जगह नहीं होती। ऐसे में जब खून या सूजन बढ़ती है, तो दबाव सीधे ब्रेन पर पड़ता है। इससे ब्लड फ्लो कम हो सकता है और ब्रेन डैमेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    ब्रेन हैमरेज के प्रकार

    रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेन हैमरेज को उसके स्थान के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाता है:

    • एपिड्यूरल हैमरेज: खोपड़ी और दिमाग की बाहरी परत के बीच, आमतौर पर सिर की चोट से।
    • सबड्यूरल हैमरेज: दिमाग की परतों के बीच, जो अचानक या धीरे-धीरे विकसित हो सकता है, खासकर बुजुर्गों में।
    • सबअरेक्नॉइड हैमरेज: अचानक तेज सिरदर्द के साथ, अक्सर एन्यूरिज़्म या गंभीर चोट के कारण।
    • इंट्रासेरेब्रल हैमरेज: सीधे दिमाग के टिश्यू में, जो अक्सर हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा होता है।
    • इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज: दिमाग की अंदरूनी कैविटी में खून बहना।

    ब्रेन हैमरेज के कारण

    50 साल से कम उम्र के लोगों में सिर की गंभीर चोट एक प्रमुख कारण है। वहीं लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर नसों को कमजोर कर देता है, जिससे उनके फटने का खतरा रहता है। इसके अलावा एन्यूरिज़्म, ब्लड डिसऑर्डर और कुछ दवाएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

    ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण

    • अचानक बहुत तेज सिरदर्द
    • दौरे या बेहोशी
    • नजर धुंधली होना
    • हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
    • बोलने या समझने में दिक्कत

    इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है।

    जांच और इलाज

    ब्रेन हैमरेज की पुष्टि के लिए CT स्कैन और MRI किए जाते हैं। इलाज में ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना, दौरे रोकने की दवाएं देना और गंभीर मामलों में सर्जरी शामिल होती है।

    रिकवरी और बचाव

    ब्रेन हैमरेज के बाद याददाश्त, ध्यान और व्यवहार पर असर पड़ सकता है। फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और नियमित रिहैबिलिटेशन से रिकवरी बेहतर हो सकती है। बचाव के लिए हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, नियमित व्यायाम और हेल्दी डाइट अपनाना बेहद जरूरी है।

  • Benefits Of Chewing Cardamom After Meals: खाने के बाद इलायची चबाने से मिलते हैं ये जबरदस्त फायदे

    Benefits Of Chewing Cardamom After Meals: खाने के बाद इलायची चबाने से मिलते हैं ये जबरदस्त फायदे

    सोशल संवाद / डेस्क : इलायची अपनी खुशबू और स्वाद के कारण मसालों में खास पहचान रखती है। मीठे पकवान हों या नमकीन डिश, इलायची हर जगह अपनी जगह बना लेती है। भारत में खाने के बाद इलायची चबाने की परंपरा काफी पुरानी है। यह आदत सिर्फ माउथ फ्रेशनर की तरह काम नहीं करती, बल्कि पाचन सुधारने और मुंह की सफाई में भी मददगार मानी जाती है।

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    Journal of Pharmacy and Technology के अनुसार, इलायची में मौजूद नेचुरल एंटीमाइक्रोबियल गुण मुंह की बदबू कम करने में असरदार होते हैं।

    खाने के बाद इलायची चबाने के प्रमुख फायदे

    डॉ. मंजूषा अग्रवाल के अनुसार, इलायची में सिनेओल, लिमोनीन, टरपिनीन और फ्लेवोनॉयड्स जैसे एक्टिव कंपाउंड्स पाए जाते हैं। ये तत्व सूजन कम करने, पाचन को बेहतर बनाने, सांसों को ताजा रखने और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करने में सहायक होते हैं।

    PubMed में प्रकाशित रिसर्च बताती है कि भोजन के बाद इलायची चबाने से पैंक्रियाटिक एंजाइम्स जैसे लाइपेज, एमाइलेज और प्रोटीएज सक्रिय होते हैं। इससे भोजन को तोड़ने और पचाने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।

    गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत

    Science Gate के मुताबिक, इलायची में कार्मिनेटिव और एंटी-फ्लैटुलेंस गुण होते हैं, जो पेट में बनने वाली गैस और सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
    इलायची में मौजूद 1,8-सिनेओल, अल्फा-पाइनीन, सैबिनीन, लिमोनीन और टरपिनियोल जैसे तत्व सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं। PMC और SAGE Journal के अनुसार, ये कंपाउंड्स पेट की अंदरूनी परत को शांत कर सकते हैं, जिससे एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न की समस्या कम हो सकती है।

    सांसों की बदबू दूर करने में कैसे मदद करती है इलायची?

    इलायची में मौजूद बायोएक्टिव तत्व इसे खास खुशबू देते हैं। इसके बीज चबाने से मुंह में लार का प्रवाह बढ़ता है, जिससे ड्राई माउथ की समस्या कम होती है। PubMed Central के अनुसार, लार बढ़ने से दांतों की प्राकृतिक सफाई होती है और मुंह की दुर्गंध दूर होती है।

    इलायची कैसे और कितनी चबानी चाहिए?

    खाने के बाद हरी इलायची लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह ज्यादा सुगंधित और औषधीय होती है।
    दांतों से हल्का दबाकर फली तोड़ें और अंदर के बीज चबाएं, जबकि छिलका फेंक सकते हैं। आमतौर पर 1 इलायची पर्याप्त होती है। ज्यादा मात्रा लेने से मुंह में जलन, खांसी या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

    डॉक्टर्स के अनुसार, पित्त की पथरी, गर्भावस्था, ब्रेस्टफीडिंग या कुछ दवाएं लेने वाले लोगों को इलायची का सेवन सावधानी से करना चाहिए। विशेषज्ञ रोजाना नहीं, बल्कि 15–20 दिन में एक बार इलायची चबाने की सलाह देते हैं।

  • Health Risks of Using Phone on Toilet: टॉयलेट में मोबाइल चलाने की आदत से बढ़ रहा है सेहत का खतरा

    Health Risks of Using Phone on Toilet: टॉयलेट में मोबाइल चलाने की आदत से बढ़ रहा है सेहत का खतरा

    सोशल संवाद / डेस्क : आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि कई लोग टॉयलेट जाते समय भी फोन साथ ले जाना नहीं भूलते। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या गेम खेलना आम बात हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठना बवासीर से लेकर रेक्टल प्रोलैप्स जैसी खतरनाक समस्याओं को जन्म दे सकता है।

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    एक्सपर्ट्स क्यों कर रहे हैं चेतावनी?

    CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर, डलास के कोलोरेक्टल सर्जन डॉ. लाई शुए बताते हैं कि पेट और मल त्याग से जुड़ी समस्याओं वाले कई मरीजों में टॉयलेट में ज्यादा देर बैठने की आदत पाई जाती है। वहीं, न्यूयॉर्क के स्टोनी ब्रुक मेडिसिन की गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. फराह मोंजूर के मुताबिक, टॉयलेट में बैठने का सुरक्षित समय 5 से 10 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए।

    शरीर पर क्या पड़ता है असर?

    डॉक्टर्स के अनुसार, टॉयलेट सीट की बनावट और गुरुत्वाकर्षण बल के कारण लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है। इससे गुदा और मलाशय की नसों में खून जमा होने लगता है, जो सही तरीके से वापस नहीं जा पाता। नतीजतन, नसें सूज जाती हैं और हेमोरॉयड्स (बवासीर) का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, ज्यादा देर तक जोर लगाने से पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो जाती हैं, जिससे कब्ज, दर्द और मल या पेशाब रोकने में परेशानी हो सकती है।

    चीन का चौंकाने वाला मामला

    इस आदत के गंभीर परिणाम का एक मामला चीन में भी सामने आ चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक व्यक्ति रोज करीब 30 मिनट तक टॉयलेट में बैठकर मोबाइल पर वीडियो गेम खेलता था। एक दिन मल त्याग के दौरान उसका मलाशय करीब छह इंच तक बाहर निकल आया। डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे रेक्टल प्रोलैप्स बताया और इसकी वजह लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने की आदत को माना।

    कैसे रखें अपनी सेहत सुरक्षित?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टॉयलेट में मोबाइल, किताब या मैगजीन ले जाने से बचें। अगर 10 मिनट में मल त्याग न हो, तो जबरदस्ती जोर लगाने के बजाय उठकर थोड़ी देर टहलें। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त पानी पिएं और फाइबर युक्त आहार जैसे दालें, ओट्स, फल और हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें। यदि लंबे समय से कब्ज, खून आना या टॉयलेट में असामान्य रूप से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

    टॉयलेट में मोबाइल चलाने की आदत भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप बड़ी बीमारी से खुद को बचा सकते हैं।

  • घर का खाना खाने के बावजूद क्यों हो रही पोषण की कमी? जानें सही कुकिंग और डाइट के तरीके

    घर का खाना खाने के बावजूद क्यों हो रही पोषण की कमी? जानें सही कुकिंग और डाइट के तरीके

    सोशल संवाद/डेस्क : आजकल ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि घर का बना खाना हमेशा सेहतमंद और पौष्टिक होता है। लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि नियमित रूप से घर का खाना खाने के बावजूद लोग थकान, कमजोरी, बाल झड़ना या ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं। इसका कारण केवल खान-पान नहीं, बल्कि खाना पकाने का तरीका, डाइट में विविधता की कमी और गलत फूड कॉम्बिनेशन भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम समझें कि सिर्फ घर का खाना खाना ही काफी नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से तैयार करना और संतुलित आहार लेना भी उतना ही जरूरी है।

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    गलत कुकिंग तरीका बन सकता है समस्या

    भारतीय रसोई में अक्सर सब्जियों और दालों को बहुत ज्यादा पकाने या भूनने की आदत होती है। इससे विटामिन C और B-कॉम्प्लेक्स जैसे जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कई लोग सब्जियां काटने के बाद धोते हैं, जिससे पानी में घुलने वाले विटामिन्स बह जाते हैं। वहीं, ज्यादा तेल में तलने से भी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और खाना सिर्फ कैलोरी का स्रोत बनकर रह जाता है। सही कुकिंग तरीका अपनाना न्यूट्रिशन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

    एक जैसी डाइट से घटता है पोषण

    अक्सर घरों में रोजाना एक ही तरह का भोजन बनता है, जैसे दाल-चावल या रोटी-सब्जी। हालांकि यह भोजन जरूरी है, लेकिन शरीर को अलग-अलग प्रकार के विटामिन, मिनरल्स और फाइटोकेमिकल्स की जरूरत होती है। अगर आपकी थाली में रंग-बिरंगी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और अलग-अलग दालें शामिल नहीं हैं, तो पोषण की कमी होना तय है। संतुलित आहार के लिए डाइट में विविधता लाना जरूरी है।

    गलत समय और फूड कॉम्बिनेशन

    खाने का समय और उसके साथ लिए जाने वाले पेय पदार्थ भी पोषण पर असर डालते हैं। खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से आयरन और कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है। इसके अलावा, तनाव में खाना खाने से पाचन तंत्र कमजोर पड़ता है और शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसलिए शांत माहौल में और सही समय पर भोजन करना जरूरी है।

    पोषण बढ़ाने के आसान उपाय

    1. सब्जियों को ज्यादा उबालने या तलने की बजाय भाप में पकाएं या धीमी आंच पर ढककर बनाएं।
    2. लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल करें, इससे खाने में आयरन की मात्रा बढ़ती है।
    3. हर भोजन के साथ सलाद या कच्ची सब्जियां जरूर शामिल करें ताकि फाइबर और एंजाइम्स मिल सकें।
    4. दालों और अनाज को पकाने से पहले कुछ घंटों तक भिगोकर रखें, इससे उनका पाचन बेहतर होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है।
    5. डाइट में मौसमी फल, नट्स और अलग-अलग अनाज शामिल करें।

    हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी

    सिर्फ सही डाइट ही नहीं, बल्कि पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण भी शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कई बार लोग हेल्दी खाना खाने के बावजूद अनियमित दिनचर्या के कारण पोषण की कमी का सामना करते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना संतुलित भोजन लेना।

  • तीन दिन बाद फरार आरोपी लंबोदर पलाई को बोलानी पुलिस ने किया गिरफ्तार

    तीन दिन बाद फरार आरोपी लंबोदर पलाई को बोलानी पुलिस ने किया गिरफ्तार

    सोशल संवाद/बड़बिल (रिपोर्ट–संजय सिन्हा):बोलानी थाना कांड संख्या 17/26 के तहत POCSO एक्ट में फरार नामजद आरोपी लंबोदर पलाई को बीते मंगलवार को बोलानी पुलिस की टीम ने जोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत डीडीएम कार्यालय के निकट से गिरफ्तार कर लिया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोलानी पुलिस ने आरोपी का लोकेशन ट्रेस कर उसे धरदबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रात्रि में ही चालान कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया

    बताया जा रहा है कि आरोपी लंबोदर पलाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह तीन दिनों से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी को लेकर बोलानी क्षेत्र के लोगों द्वारा लगातार प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा था, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।