सोशल संवाद/डेस्क: शहर के प्रमुख टाटानगर रेलवे स्टेशन के पार्किंग स्टैंड को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया गया है। रेलवे प्रशासन ने पुराने ठेकेदार का अनुबंध समाप्त कर दिया है और अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल अगले दो महीनों तक पार्किंग व्यवस्था रेलवे स्वयं अपने स्तर से संचालित करेगा।
यह भी पढ़ें: रामनवमी पर अलर्ट रांची: 3000 पुलिसकर्मी तैनात, सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी
जानकारी के अनुसार, जिस ठेकेदार को पार्किंग संचालन का जिम्मा दिया गया था, उसे अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने के कारण हटाया गया है। मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि ठेकेदार द्वारा पार्किंग से होने वाली आय का निर्धारित हिस्सा रेलवे को जमा नहीं किया जा रहा था। बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर रेलवे ने सख्त कदम उठाते हुए अनुबंध समाप्त कर दिया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। वर्तमान में पार्किंग स्टैंड को रेलवे अपने नियंत्रण में चला रहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या अनियमितता न हो। अधिकारियों के अनुसार, लगभग दो महीनों के भीतर नई टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और योग्य ठेकेदार को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
तीन साल में 7 करोड़ चुकाना बना मुश्किल
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार के लिए तीन वर्षों में करीब 7 करोड़ रुपये का भुगतान करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। पार्किंग से अपेक्षित राजस्व नहीं मिलने के कारण उसने समय पर राशि जमा नहीं की। इससे रेलवे को वित्तीय नुकसान होने लगा। परिणामस्वरूप, ठेकेदार ने भुगतान प्रक्रिया ही धीमी कर दी, जिसके बाद रेलवे ने अनुबंध समाप्त करने का निर्णय लिया।
बताया जाता है कि इससे पहले शेल इंजीनियरिंग नामक कंपनी को करीब 4 करोड़ रुपये में पार्किंग का ठेका दिया गया था। बाद में नई बोली में यह राशि बढ़कर 7 करोड़ तक पहुंच गई, जो ठेकेदार के लिए भारी पड़ गई। अंततः आर्थिक दबाव के कारण वह अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं कर सका।
शुरू से ही विवादों में रहा पार्किंग स्टैंड
टाटानगर रेलवे स्टेशन का पार्किंग स्टैंड लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। अलग-अलग समय में विभिन्न ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा और विवाद की स्थिति बनी रही। कभी शुल्क को लेकर तो कभी संचालन के तरीकों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
इतना ही नहीं, अतीत में इस पार्किंग स्टैंड से जुड़े विवाद हिंसक रूप भी ले चुके हैं। एक समय गोलीबारी की घटना भी सामने आई थी, जिसमें एक टेंपो चालक की जान चली गई थी। इसके बावजूद पार्किंग संचालन लगातार विवादों के बीच चलता रहा।
यात्रियों को मिलेगी राहत की उम्मीद
रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे द्वारा सीधे संचालन से फिलहाल पारदर्शिता और अनुशासन में सुधार देखा जा सकता है। साथ ही, नई टेंडर प्रक्रिया में ऐसे ठेकेदार के चयन की उम्मीद है, जो नियमों का पालन करते हुए बेहतर सेवा प्रदान कर सके।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।









