सोशल संवाद / डेस्क : शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि आपसी समझ, भरोसे और जिम्मेदारियों का रिश्ता भी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज ने एक अनोखी पहल की है। कॉलेज में ‘तेरे मेरे सपने’ नाम से प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर शुरू किया गया है। यहां युवाओं को शादी से पहले रिश्तों को समझने, बेहतर संवाद करने और वैवाहिक जीवन की चुनौतियों से निपटने के तरीके बताए जाएंगे।
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यह दिल्ली विश्वविद्यालय का पहला प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की मेंटरशिप में शुरू किया गया यह देशभर में इस पहल के तहत स्थापित 300वां केंद्र बताया गया है। इसका उद्घाटन राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के रहाटकर ने किया।
शादी से पहले किन बातों की मिलेगी ट्रेनिंग?
‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर में शादी के बारे में विचार कर रहे युवाओं को स्वैच्छिक काउंसलिंग दी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से इन विषयों पर मार्गदर्शन मिलेगा:
- बेहतर संवाद: पार्टनर के साथ खुलकर और प्रभावी तरीके से बातचीत करना।
- आपसी अपेक्षाएं: एक-दूसरे की भावनाओं और उम्मीदों को समझना।
- मतभेदों का समाधान: रिश्तों में होने वाली गलतफहमियों और विवादों को बातचीत से सुलझाना।
- वैवाहिक जिम्मेदारियां: शादी के बाद बदलने वाली जिम्मेदारियों और चुनौतियों को समझना।
- रिश्तों की समझ: आपसी सम्मान, तालमेल और स्वस्थ संबंधों को मजबूत करना।
शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
सेंटर के संचालन के लिए कॉलेज के चार से पांच शिक्षकों को राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से प्रशिक्षण दिया गया है। कॉलेज की योजना प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों, काउंसलरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इससे जोड़ने की है, ताकि जरूरत के अनुसार युवाओं को विशेषज्ञों की सहायता मिल सके।
कॉलेज परिसर से बाहर भी पहुंचेगी पहल
कमला नेहरू कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पवित्रा भारद्वाज के अनुसार, इस पहल का लाभ केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। कॉलेज के शिक्षक और छात्र स्वयंसेवक आसपास के इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सेंटर की सेवाओं के बारे में जानकारी देंगे।
काउंसलिंग लेना अनिवार्य नहीं
इस सेंटर की एक खास बात यह है कि यहां काउंसलिंग पूरी तरह स्वैच्छिक होगी। यानी शादी से पहले मार्गदर्शन लेने के लिए किसी पर दबाव नहीं होगा। इच्छुक युवा अपनी जरूरत के अनुसार यहां सहायता ले सकेंगे।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले ही आपसी समझ, संवाद और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे निजी जीवन से जुड़े फैसले सोच-समझकर ले सकें।











