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WAPCOS विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने वित्तीय दावों और 682 पदों के सरेंडर पर मांगे सबूत, मंत्रालय की कंपनी पर उठे गंभीर सवाल

By Riya Kumari

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WAPCOS विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने वित्तीय दावों और 682 पदों के सरेंडर पर मांगे सबूत, मंत्रालय की कंपनी पर उठे गंभीर सवाल

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सोशल संवाद / नई दिल्ली : जल शक्ति मंत्रालय के अधीन कार्यरत मिनी रत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी WAPCOS लिमिटेड इन दिनों कानूनी और प्रशासनिक सवालों के घेरे में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को Piyush Kumar Singh & Others vs Union of India & Others (W.P.(C) 3843/2026 एवं संबंधित मामलों) की सुनवाई के दौरान कंपनी द्वारा दायर हलफनामों में किए गए कई दावों पर सवाल उठाते हुए उनसे दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।

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हाईकोर्ट ने वित्तीय संकट के दावे पर मांगे दस्तावेज

सुनवाई के दौरान WAPCOS की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहद कमजोर बताते हुए इसे “डूबते जहाज” जैसी स्थिति वाला बताया। उनका कहना था कि कंपनी कर्मचारियों के रोजगार को बनाए रखने में भी कठिनाई महसूस कर रही है और कई बार अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए भी धन उधार लेना पड़ा।

हालांकि, न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने इस दावे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनी ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है। अदालत ने WAPCOS को पिछले पांच वित्तीय वर्षों की ऑडिटेड बैलेंस शीट रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया है।

682 पदों के सरेंडर पर भी उठे सवाल

अदालत ने WAPCOS के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि स्वीकृत 1,541 पदों में से 682 पद सरेंडर कर दिए गए हैं।

कोर्ट ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कोई बोर्ड प्रस्ताव, एजेंडा पेपर, बैठक की कार्यवाही (Minutes) या अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने कंपनी को इन सभी दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसा निर्णय कब और किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।

नियमितीकरण प्रक्रिया की जांच के निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि WAPCOS के अपने हलफनामों में पिछली नियमितीकरण (Regularisation) प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात स्वीकार की गई है। अदालत के अनुसार, यह प्रक्रिया सार्वजनिक रोजगार से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों और लागू भर्ती नियमों के अनुरूप नहीं थी।

कोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और उस पर की गई सुधारात्मक कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा भी दाखिल करे।

नियुक्तियों और पदोन्नति पर भी उठे सवाल

मामले में कुछ नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। अदालत ने संकेत दिया कि जांच समिति को इन मामलों की भी समीक्षा करनी चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ कर्मचारियों के नियमितीकरण और पदोन्नति में भर्ती नियमों से अलग प्रक्रिया अपनाई गई। इन आरोपों की सत्यता पर अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।

WAPCOS की कार्यप्रणाली पर बढ़ी निगरानी

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कभी लाभदायक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत रही WAPCOS की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुई है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और आगे की सुनवाई के आधार पर ही होगी।

22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 तय की है। इस दौरान WAPCOS को अपनी ऑडिटेड बैलेंस शीट, बोर्ड रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। अदालत में दाखिल होने वाले ये रिकॉर्ड आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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