सोशल संवाद / डेस्क : भारत ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के क्षेत्र में पिछले एक दशक में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्व बैंक (World Bank) की Global Findex 2025 Report के अनुसार, वर्ष 2024 तक देश के लगभग 89% वयस्कों के पास बैंक या मोबाइल मनी खाता है। वर्ष 2011 में यह आंकड़ा केवल 35% था। यानी मात्र 13 वर्षों में भारत ने दुनिया में वित्तीय समावेशन की सबसे तेज़ प्रगति करने वाले देशों में अपनी जगह बना ली है।
हालांकि रिपोर्ट एक बड़ी चुनौती की ओर भी संकेत करती है। देश में 16% बैंक खाते निष्क्रिय (Inactive Accounts) हैं, जो वैश्विक औसत से दोगुने से भी अधिक है।
2021 से 2024 के बीच तेजी से बढ़ा बैंक खातों का दायरा
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बैंक खाताधारकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- 2021 में 77.5% वयस्कों के पास वित्तीय खाता था।
- 2024 में यह बढ़कर 89% हो गया।
- इनमें 88.7% खाते बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों में हैं।
- 23.1% वयस्कों के पास मोबाइल मनी अकाउंट भी है।
यह वृद्धि प्रधानमंत्री जन धन योजना, डिजिटल बैंकिंग और UPI (Unified Payments Interface) जैसी सेवाओं के विस्तार का परिणाम मानी जा रही है।
क्या है Mobile Money?
मोबाइल मनी ऐसी वित्तीय सेवा है जिसके जरिए मोबाइल फोन या टैबलेट से पैसे भेजने, प्राप्त करने और अन्य लेन-देन किए जा सकते हैं। यह सेवा बैंक खाते से जुड़ी भी हो सकती है और बिना बैंक खाते के भी संचालित हो सकती है।
डिजिटल बैंकिंग में अभी लंबा सफर बाकी
रिपोर्ट बताती है कि भारत में केवल 31.1% खाते ही डिजिटल रूप से सक्षम (Digitally Enabled) हैं, यानी वे कार्ड या मोबाइल आधारित डिजिटल लेन-देन के लिए सक्रिय हैं। इसके अलावा, पिछले 12 महीनों में केवल 48.5% भारतीय वयस्कों ने डिजिटल भुगतान किया या प्राप्त किया। यह आंकड़ा निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) के औसत से भी कम है।
महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा वित्तीय समावेशन
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग पहुंच में लैंगिक अंतर लगभग समाप्त हो चुका है।
- 89.2% महिलाओं के पास बैंक खाता है।
- 89.9% ग्रामीण आबादी भी बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुकी है।
यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं और डिजिटल भुगतान प्रणाली का लाभ ग्रामीण और महिला वर्ग तक भी प्रभावी रूप से पहुंचा है।
16% बैंक खाते क्यों हैं निष्क्रिय?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 14% वयस्क, यानी 16% खाताधारकों, ने पिछले 12 महीनों में अपने बैंक खाते का एक बार भी उपयोग नहीं किया। यह वैश्विक औसत 6% की तुलना में काफी अधिक है। विश्व बैंक का कहना है कि यदि भारत को अलग कर दिया जाए तो निम्न और मध्यम आय वाले देशों में निष्क्रिय खातों का औसत केवल 4% रह जाता है।
बैंक खाता नहीं होने के प्रमुख कारण
जिन लोगों के पास अभी भी बैंक खाता नहीं है, उन्होंने कई कारण बताए हैं।
- परिवार के किसी अन्य सदस्य के पास पहले से बैंक खाता होना।
- पर्याप्त आय या धन की कमी।
- बैंकिंग सेवाओं की लागत।
- बैंक शाखाओं की दूरी।
- वित्तीय सेवाओं तक सीमित पहुंच।
रिपोर्ट के अनुसार, परिवार में पहले से एक खाता होने के कारण व्यक्तिगत खाता नहीं खुलवाना भारत में सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है।
दुनिया में क्या है स्थिति?
Global Findex 2025 Report के अनुसार—
- दुनिया भर में 79% वयस्कों के पास वित्तीय खाता है।
- 2021 में यह आंकड़ा 74% था।
- 2011 में केवल 51% वयस्क बैंकिंग प्रणाली से जुड़े थे।
- इसके बावजूद दुनिया में अभी भी 1.3 अरब वयस्क बैंकिंग सेवाओं से वंचित हैं।










