सोशल संवाद / डेस्क : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद देशभर में परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है। कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। इसी बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि दुनिया के अन्य देशों में परीक्षा कॉपियों की जांच किस तरह की जाती है और वहां डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली कितनी प्रभावी मानी जाती है।
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क्या है CBSE का OSM सिस्टम?
CBSE ने वर्ष 2026 में कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू की। इस प्रक्रिया में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप से परीक्षकों के सामने उपलब्ध कराया जाता है, जिन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर ही मूल्यांकन करना होता है। बोर्ड का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है, रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होती है।
हालांकि, कुछ छात्रों ने धुंधली स्कैन कॉपियों, पोर्टल संबंधी समस्याओं और मूल्यांकन में कथित त्रुटियों को लेकर चिंता जताई है। वहीं CBSE ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक मूल्यांकन पोर्टल सुरक्षित है और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई स्तरों पर गुणवत्ता जांच की व्यवस्था मौजूद है।
विदेशों में कैसे होती है कॉपियों की जांच?
दुनिया के कई देशों में वर्षों से डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और कई यूरोपीय देशों के परीक्षा बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन मूल्यांकन कराते हैं। इससे उत्तर पुस्तिकाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की आवश्यकता कम हो जाती है और मूल्यांकन की निगरानी भी आसान हो जाती है।
डिजिटल मूल्यांकन के प्रमुख फायदे
- मूल्यांकन प्रक्रिया में तेजी
- परीक्षकों की कार्यप्रणाली पर बेहतर निगरानी
- उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज
- री-चेकिंग और ऑडिट की आसान व्यवस्था
- मूल्यांकन में मानकीकरण और पारदर्शिता
विशेषज्ञों का मानना है कि सही तकनीकी ढांचे और पर्याप्त प्रशिक्षण के साथ डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली परीक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती है।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
CBSE के OSM सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया और छात्र समुदाय में कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ छात्रों ने स्कैन की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि कई शिक्षाविदों का मानना है कि किसी भी नई प्रणाली को पूरी तरह प्रभावी बनने में समय लगता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी छात्रों द्वारा विभिन्न अनुभव साझा किए गए हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CBSE का क्या कहना है?
CBSE ने बार-बार स्पष्ट किया है कि केवल मूल्यांकन का माध्यम बदला गया है, अंक देने की प्रक्रिया या मार्किंग स्कीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बोर्ड का कहना है कि OSM सिस्टम सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए व्यापक सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण उपाय अपनाए गए हैं।
भविष्य में बढ़ सकता है डिजिटल मूल्यांकन का दायरा
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में अधिक परीक्षा बोर्ड ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचा, बेहतर स्कैनिंग गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा और परीक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
CBSE के OSM सिस्टम को लेकर जारी बहस ने परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। डिजिटल मूल्यांकन कोई नई अवधारणा नहीं है और कई देशों में इसका सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। लेकिन किसी भी तकनीकी बदलाव की सफलता उसके क्रियान्वयन, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। ऐसे में आने वाले समय में शिक्षा बोर्डों के सामने तकनीक और भरोसे के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।









