सोशल संवाद/डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने PM मोदी के इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले भी कुछ लोगों और विचारों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती रही है।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जिन लोगों को पहले ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे, उनकी कई मांगों को बाद में सरकार ने खुद स्वीकार किया।
कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में जाति जनगणना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को पहले सरकार की ओर से अलग नजरिए से देखा जाता था, बाद में उन्हीं पर सरकार ने कदम उठाए।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि अगर ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इस शब्द से उसका मतलब क्या है।
लाल किले से PM मोदी ने क्या कहा था?
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए PM मोदी ने नक्सलवाद का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ जैसी चुनौती को भी पहचानने की जरूरत है।
PM मोदी ने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग करने की बात कही थी, ताकि देश के युवाओं को एकजुट कर विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाया जा सके।
बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल
PM मोदी के इस बयान के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जयराम रमेश के बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में ‘दिमागी नक्सल’ का मुद्दा राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकता है।









